रोजाना स्कूल जाता है, हाथों के जगह अपने पैरों से लिखता है और बाकि बच्चों की तरह ही पढ़ाई और दूसरे काम करता है जिसमें उसके परिवारजन क्लास के सहपाठियों और स्कूल के शिक्षक उसकी भरपूर मदद करते हैं। साल भर जगन्नाथ सबके बीच अपनी दिव्यांगता को भूलकर हंसते खेलते रहता है, परंतु रक्षाबंधन के पास आते ही उसे अपने हाथ न होने का मलाल होता है और वह इस दौरान कई दिनों तक उदास ही रहता है।