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अखिलेश का योगी सरकार पर बड़ा हमला, बोले- ‘निवेश नहीं, कागजी कंपनियों से हुए एमओयू चल रहा भ्रष्टाचार का टूर्नामेंट

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के एमओयू को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कई निवेश समझौते कथित तौर पर अनरजिस्टर्ड और कागजी कंपनियों से हुए। अखिलेश ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
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अखिलेश यादव फोटो सोर्स पत्रिका

अखिलेश यादव फोटो सोर्स पत्रिका

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के निवेश दावों को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि प्रदेश में निवेश के नाम पर कागजी कंपनियों से समझौते किए गए। उन्होंने दावा किया कि कई कंपनियां अनरजिस्टर्ड हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर योगी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए सरकार पर कागजी कंपनियों के साथ समझौते करने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि "भाजपाइयों के संगी-साथी ही नहीं, इनकी तो कंपनियां भी अनरजिस्टर्ड निकलीं। यूपी में इन्वेस्टमेंट नहीं, भाजपाई के बीच टूर्नामेंट चल रहा है।

कागजी कंपनियां, हवाई एमओयू

उन्होंने आगे कहा कि कागजी कंपनियां, हवाई एमओयू समझौता उत्तर प्रदेश के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन की हकीकत को उजागर करते हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के निवेश के लिए कई एमओयू समझौता पर हस्ताक्षर किए। लेकिन इनमें कुछ समझौते ऐसी कंपनियों के साथ किए गए। जिनका कोई स्पष्ट कॉरपोरेट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन कंपनियों के प्रमोटरों की साख भी संदेह के घेरे में है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट पर उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार को प्रदेश के लोगों के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन कंपनियों के साथ निवेश समझौते किए गए। उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। अब तक उन परियोजनाओं पर कितना काम हुआ है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस संबंध में योगी सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।