
देश का सबसे बड़ा जीएसटी घोटाला, 400 करोड़ का फर्जीवाड़ा
कानपुर. जीएसटी की पहली वर्षगांठ के चार दिन बाद ही सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। कानपुर के नयागंज के दो व्यापारियों ने फर्जी बिलिंग के जरिए 400 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा किया है। दोनों व्यापारियों ने 60 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने के साथ-साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना भी लगाया है। फजीवाड़ा करने वाले व्यापारियों के नाम मनोज कुमार जैन और चंद्रप्रकाश तायल हैं। दोनों व्यापारी बोगस फर्मों की आड़ में कागज पर कारोबार करते थे और अपने ग्राहकों को फर्जी बिल व इनवायस काटते थे। इस बिल के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा ठोंककर सरकारी खजाने से रकम निकालते थे, जो उन्होंने कभी टैक्स के रूप में जमा ही नहीं किए थे। चर्चा है कि इस घोटाले में तमाम सरकारी अफसर भी शामिल हैं, जल्द ही उनके नाम भी सामने आएंगे।
जीएसटी महानिदेशालय की खुफिया विंग ने पकड़ा घोटाला
इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में बड़े दावों का पड़ताल के दौरान जीएसटी इंटेलीजेंस को कानपुर के दोनों व्यापारियों पर शक हुआ तो दोनों की फर्म की खरीद-फरोख्त को जांचा गया। यहां गड़बड़ी मिलने पर बीती शाम डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) की टीम ने नयागंज की 10 फर्मों पर छापे मारकर मनोज कुमार जैन और चंद्रप्रकाश तायल को गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद यह देश का सबसे बड़ा घोटाला है। इससे पहले 21 मई को जयपुर में 58 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा किया गया था। उस दौरान राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में छापे मारे गए थे। गिरफ्तार व्यापारी सीमेंट, बिटुमिन, कच्चे चमड़े, प्लास्टिक के दाने, बीओपीपी फिल्मों और धातुओं की आपूर्ति के लिए फर्जी बिल जारी कर रहे थे। आरोपी ऐसे चालान अपने ग्राहकों को आईटीसी के जरिए लाभ पहुंचाने के लिए जारी कर रहे थे। डीजीजीआई लखनऊ जोनल यूनिट के अपर महानिदेशक राजेंद्र सिंह के निर्देश पर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। छापेमारी का नेतृत्व उप निदेशक डीजीजीआई कमलेश कुमार ने किया। इसमें वरिष्ठ खुफिया अधिकारी पीएम त्रिपाठी, पीके त्रिपाठी, ब्रजेश त्रिपाठी, उपदेश सिंह सहित अन्य अफसरों ने हिस्सा लिया।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों व्यापारी
वित्त मंत्रालय के विशेष वकील दिग्विजय नाथ दूबे के मुताबिक, दोनों अभियुक्तों ने करीब एक हजार करोड़ का घपला किया है। इस मामले की एफआईआर लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज कराई गई है। अभियुक्त चंद्र प्रकाश तायल ने 100 करोड़ का फर्जी बिल बनाया, जिससे केंद्र सरकार को करीब 16 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि दूसरे अभियुक्त मनोज कुमार जैन ने 290 करोड़ का फर्जी बिल बनाया था, जिस कारण सरकार को करीब जीएसटी के रूप में 42 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई। छापेमारी के बाद विशेष सीजेएम हिमांशु दयाल श्रीवास्तव ने फैक्ट्री मालिकों को जीएसटी में लाभ पहुंचाने की गरज से करीब 400 करोड़ का फर्जी बिल बनाने के मामले में कानपुर से गिरफ्तार अभियुक्त मनोज कुमार जैन व चंद्र प्रकाश तायल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
अरबों की टैक्स चोरी में ट्रांसपोर्टर भी शामिल
भ्रष्टाचार में गिरफ्तार निलंबित जीएसटी कमिश्नर संसारचंद का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि जीएसटी में दूसरा बड़ा घोटाला सामने आ गया। देश के सबसे बड़े घोटाले का सूत्रधार भी कानपुर से ही निकला। डीजीजीआई के उप निदेशक कमलेश कुमार के मुताबिक 400 करोड़ की इस धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड मनोज कुमार जैन है। अभी इस मामले में दस से ज्यादा व्यापारियों की तलाश जारी है। गौरतलब है कि नयागंज किराना सहित अन्य जिंसों के थोक कारोबार का यूपी में सबसे बड़ा बाजार है। कागजों पर दर्जन भर से ज्यादा कंपनियां चलाने वाले मनोज कुमार जैन और चंद्रप्रकाश तायल चार महीने से खुफिया विंग के रडार में थे। दोनों ने जीएसटी रिटर्न में आईटीसी के माध्यम से जीएसटी का भुगतान दिखाया था। अरबों की टैक्स चोरी के इस सिंडीकेट में ट्रांसपोर्टर भी शामिल हैं, जो फर्जी बिल्टी या कन्साइनमेंट नोट जारी करते थे। इससे ये साबित किया जाता था कि सामान का मूवमेंट किया जा रहा है। इसके लिए फर्जी ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। उप निदेशक कमलेश कुमार ने बताया कि गिरफ्तार व्यापारियों की फर्मों में कई निदेशक हैं। जिनका ब्योरा तैयार किया गया है। छापेमारी में दूसरे निदेशक नहीं मिले, जल्द उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद फ्रॉड की रकम बढ़ सकती है।
एप से पहचानें - कंपनी असली है नकली
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं उत्पाद शुल्क बोर्ड ने ग्राहकों को फर्जीवाड़े से बचाने के लिए गुरुवार को वेरीफाई एप लांच किया है। इस एप के जरिये ग्राहक जान सकेंगे कि उनसे किसी सामान पर जीएसटी वसूलने वाली कंपनी को इसका अधिकार मिला है या नहीं। यानी जीएसटीएन के तहत पंजीकृत है या नहीं। यह जीएसटी लेने वाले व्यक्ति या कंपनी के बारे में पूरी जानकारी देगी।
Published on:
06 Jul 2018 10:38 am
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