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गजब बेपरवाही: नौ माह से रेल यात्रियों का नि:शुल्क उपचार बंद, मेडिकल एसोसिएशन से सोसायटी ले रही रुपए

Free treatment for railway passengers stopped
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कटनी

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Balmeek Pandey

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Updated: 12 Mar 2025, 8:58 PM IST

रुपए दिए जाने के बाद भी नहीं मिल रहा इलाज, देशभर में हुआ था कटनी जंक्शन का नाम, सोसायटी की बेपरवाही से दम तोड़ गई है योजना, निगरानी पर खड़े हुए सवाल

कटनी. ट्रेन में सफर के दौरान यदि किसी भी यात्री की अचानक तबियत बिगड़ जाए तो उसको त्वरित राहत देने के लिए कटनी शहर में अनूठी पहल हुई थी। यह पहल ऐसी थी कि कंट्रोल से सूचना मिलते ही ट्रेन के स्टेशन आने पर तत्काल डॉक्टर मरीज को अटेंड करते और नि:शुल्क इलाज देते थे। हर माह कटनी जंक्शन व मुड़वारा स्टेशन में सवा सौ से अधिक यात्रियों को फायदा मिल रहा था। खास बात तो यह थी कि इस योजना के शुरू होने से कटनी का नाम देशभर में हुआ था। इसके लिए तत्कालीन कलेक्टर को पुरस्कृत भी किया गया, लेकिन रेडक्रॉस सोसायटी व जिला अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों की वजह से यह योजना सितंबर माह से ठप पड़ी है। अब यात्रियों को इलाज के बदले डॉक्टर की फीस व दवाओं का चार्ज देना पड़ रहा है। इस योजना में शहर के रिटेल मेडिकल एसोसिएशन की सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है। इस उपचार में लगने वाला खर्च उनके द्वारा वहन किया जा रहा है। बाद में राशि कम हुई तो सोसायटी ने मिलाकर रेलवे को दे रही थी, जिससे यात्रियों को बड़ा फायदा मिल रहा था। अब एसोसिएशन द्वारा राशि दिए जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेलव यात्रियों को राहत नहीं दी जा रही।

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यह था खर्चे का गणित
जानकारी के अनुसार 10 हजार रुपए कटनी जंक्शन में औसतन 90 मरीजों के इलाज में खर्च आते थे। 4 हजार रुपए मुड़वारा स्टेशन में खर्च होते थे, इस राशि से मुड़वारा स्टेशन में अटेंड होने वाली 35 से 40 मरीज यात्रियों को इलाज मिलता था। दोनों स्टेशन में मिलाकर सवा सौ यात्रियों को हर माह लाभ मिलता था।

जानकारी के अनुसार इस योजना की शुरुआत मई 2023 में हुई थी। रिटेल मेडिकल एसोसिएशन द्वारा तत्कालीन कलेक्टर अवि प्रसाद के समक्ष यह सुझाव रखा गया था कि ट्रेन में अचानक बीमार होने वाले यात्रियों को वे लोग नि:शुल्क इलाज कराना चाहते हैं। इस पर कलेक्टर ने रिटेल मेडिकल एसोसिएशन व रेडक्रॉस के बीच एमओयू कराते हुए बेहतर योजना शुरू की गई। यह योजना कई माह तक चली, लेकिन 13 अगस्त के बाद से यात्रियों का नि:शुल्क इलाज बंद कर दिया गया है।

यह मिलता था इलाज
जानकारी के अनुसार सफर के दौरान यदि कोई यात्री किसी भी ट्रेन में बीमार हो जाता था, या दवाएं भूल जाता था तो वह इमरजेंसी में रेलवे कंट्रोल व टीसी स्टॉफ को सूचना देते थे। कंट्रोल से मैसेज मिलता था कि फला गाड़ी में मरीज आ रहा है। रोग बताया जाता था। एनकेजे के रेलवे अस्पताल से चिकित्सक को बुलाकर इलाज कराया जाता था। इसमें दवाओं का शुल्क व डॉक्टर की फीस 100 रुपए प्रति मरीज फीस दी जाती थी। शुरुआती दौर में 25 हजार रुपए रेडक्रॉस दिए गए, जो सवा माह चलते थे। इसके बाद 15 हजार रुपए कर दिया गया।

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यात्रियों को देना पड़ रहा शुल्क व दवा चार्ज
हालांकि स्टेशनों में यात्रियों को इलाज तो मिल रहा है, लेकिन मरीजों व उनके परिजनों को इलाज के बदले डॉक्टर की फीस व दवाओं का शुल्क देना पड़ रहा है। इस योजना के शुरू होने से देशभर में कटनी शहर का नाम हुआ था और यात्रियों को बड़ी राहत मिल रही थी बावजूद इसके इसे बंद कर दिया गया है। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे।

एसोसिएशन ने दी यह राशि
जानकारी के अनुसार यात्रियों के इलाज के लिए रिटेल मेडिकल एसोसिएशन द्वारा योजना शुरू होने से लेकर अबतक लगभग एक लाख 85 हजार रुपए दिए जा चुके हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि 3 सितंबर 2024 में लास्ट किश्त दी गई थी। इसके बाद गैप हुआ। फरवरी व मार्च माह में भी राशि दी एसोसिएशन द्वारा रेडक्रॉस को दी जा चुकी है। हैरानी की बात तो यह है कि महत्वपूर्ण योजना शुरू की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के ध्यान न दिए जाने से योजना दम तोड़ रही है।

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वर्जन
सितंबर तक रिटेल मेडिकल एसोसिएशन द्वारा राशि दी गई है। इसके बाद गैप हो गया था। अब फरवरी व मार्च की राशि रेडक्रॉस में जमा कराई गई है। एसोसिएशन से मिलने वाली राशि को रेडक्रॉस से लगभग डबल कर रेलवे को दी जा रही थी। अब शीघ्र ही योजना को चालू किया जाएगा।
डॉ. यशवंत वर्मा, सिविल सर्जन।

रेडक्रॉस सोसायटी के द्वारा ट्रेन में यात्रियों के नि:शुल्क इलाज के लिए योजना शुरू की गई थी। हर माह सवा सौ यात्रियों का इलाज दोनों स्टेशनों में होता था। सितंबर माह से योजना बंद है। अब यात्रियों को इलाज के बदले डॉक्टर की फीस व दवाओं का चार्ज देना पड़ता है।
संजय दुबे, स्टेशन प्रबंधक कटनी जंक्शन।

रेलवे, रिटेल मेडिकल एसोसिएशन और रेडक्रॉस सोसायटी सहित रेलवे के माध्यम से शुरू हुई इस के संबंध जानकारी ली गई है। रेलवे से भी रिकॉर्ड मंगाए गए हैं। सिविल सर्जन, रेलवे के अधिकारी व एसोसिएशन के पदाधिकारियों से चर्चा कर इस दिशा में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
दिलीप यादव, कलेक्टर।