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जिला अस्पताल में नहीं है झूला घर, बच्चों की देखरेख के साथ ड्यूटी करना चुनौती

खंडवा. मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ को ड्यूटी के दौरान अपने छोटे बच्चों की देखरेख को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल के लिए अब तक झूला घर की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। इसके लिए करीब 50 हजार रुपए खर्च कर एक कक्ष तैयार किया गया था, लेकिन वर्तमान में इस कक्ष में डायलिसिस यूनिट संचालित हो रही है। ऐसे में झूला घर की सुविधा शुरू नहीं होने से महिला कर्मचारियों को बच्चों की देखभाल और ड्यूटी के बीच तालमेल बैठाना पड़ रहा है।
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झूला घर के लिए तैयार कक्ष में अब डायलिसिस युनिट संचालित
  • नर्सिंग स्टाफ के लिए प्रस्तावित थी सुविधा, 50 हजार रुपए खर्च कर तैयार किया गया कक्ष अब डायलिसिस यूनिट के उपयोग में

बच्चों की देखरेख के लिए नहीं मिल रही अलग जगह

अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी अलग-अलग वार्डों में रहती है। यहां मरीजों की देखभाल के लिए कर्मचारियों को निर्धारित समय तक अपनी जिम्मेदारी निभानी होती है। ऐसे में छोटे बच्चों की देखरेख की व्यवस्था नहीं होने से उन कर्मचारियों के सामने मुश्किल खड़ी होती है, जिनके बच्चे अभी छोटे हैं। ड्यूटी के दौरान कुछ कर्मचारियों को अपने बच्चों को साथ लाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में वे बच्चों को स्टाफ रूम में बैठाकर अपनी ड्यूटी करते हैं।

कक्ष तैयार हुआ, लेकिन शुरू नहीं हो सकी सुविधा

झूला घर के लिए अस्पताल में करीब 50 हजार रुपए खर्च कर कक्ष तैयार किया गया था। हालांकि, इस कक्ष में अब डायलिसिस यूनिट संचालित की जा रही है। इसके चलते झूला घर के लिए तैयार किए गए स्थान का उपयोग दूसरे कार्य में होने लगा और प्रस्तावित सुविधा शुरू नहीं हो पाई।

कर्मचारियों को मिलती बड़ी राहत

झूला घर शुरू करने का उद्देश्य कर्मचारियों के बच्चों को सुरक्षित स्थान पर देखभाल उपलब्ध कराना था। इससे नर्सिंग स्टाफ को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती थी। साथ ही, बच्चों की देखरेख के लिए अलग व्यवस्था होने से कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान होने वाली परेशानी भी कम हो सकती थी।

  • नर्सिंग स्टाफ के लिए झूला घर शुरू किया जाना है। स्टाफ की कमी की वजह से अभी इसे शुरू नहीं किया जा सका। - एमएल कलमे, आरएमओ, जिला अस्पताल।