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Abhishek Banerjee: जमीन घोटाले में अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय पर शिकंजा, CID की चार्जशीट में नया खुलासा

Salboni land scam: सालबोनी जमीन घोटाला मामले में सीआईडी ने चार्जशीट दाखिल कर सुमित रॉय की भूमिका को लेकर गंभीर दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने पूर्व सुरक्षाकर्मियों और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर जमीन कब्जे और कथित आर्थिक लेनदेन का जिक्र किया है।
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Abhishek Banerjee

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी। फोटो- आईएएनएस

Trinamool Congress: सालबोनी जमीन घोटाला मामले में सीआईडी का शिकंजा तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय पर कसता जा रहा है। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में दावा किया है कि विस्थापितों को आवंटित सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और जालसाजी के पीछे सुमित रॉय और पूर्व विधायक सुजय हाजरा की भूमिका थी। जांच में अभिषेक बनर्जी के दो पूर्व सुरक्षाकर्मियों के बयान को भी अहम आधार बनाया गया है। सीआईडी ने सालबोनी जमीन घोटाला मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें कुल 20 गवाहों का उल्लेख है।

सुजय हाजरा को आरोपी बनाया गया

इनमें स्थानीय निवासी और कारोबारी के अलावा अभिषेक बनर्जी के दो पूर्व सुरक्षाकर्मी और दो चालक भी शामिल हैं। चार्जशीट में सुजय हाजरा को आरोपी बनाया गया है, जबकि सुमित रॉय का नाम आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं है। जांच एजेंसी के मुताबिक स्थानीय स्तर पर जांच और गवाहों के बयानों से पता चला कि जिस जमीन को लेकर कथित जालसाजी की गई, वह सरकारी जमीन थी। यह जमीन विस्थापितों को खेती के लिए आवंटित की गई थी। आरोप है कि सुजय हाजरा, अनितेश पाइरा और उनके सहयोगियों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया। सीआईडी का दावा है कि यह कार्रवाई मुख्य रूप से सुजय हाजरा और सुमित रॉय के निर्देश पर की गई।

सुमित को जमीन बिक्री नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया

सीआईडी ने सुमित रॉय और स्थानीय लोगों के बीच कथित आर्थिक लेनदेन का भी पता लगाने का दावा किया है। गवाहों के बयानों के आधार पर जांच एजेंसी का कहना है कि जमीन की कथित जालसाजी से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा सुजय हाजरा और सुमित रॉय के कार्यालय भेजा जाता था। सुजय के लिए काम करने वाले दो कथित बिचौलियों देबाशीष दे और सुब्रत हाजरा ने भी सुमित को पैसे भेजे जाने की बात स्वीकार करने का दावा किया गया है। सीआईडी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी के दोनों पूर्व सुरक्षाकर्मियों ने अपने बयानों में सुमित रॉय को कथित जमीन बिक्री नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया है। इसके अलावा, सैयदपुर गांव के दो निवासियों ने भी सुजय हाजरा और सुमित रॉय के बीच कथित आर्थिक लेनदेन की जानकारी जांच अधिकारियों को दी है। उनका कहना है कि डर के कारण वे लंबे समय तक इस बारे में किसी से कुछ नहीं कह सके।

दस्तावेजों में फर्जी विक्रेताओं का शक

जांच एजेंसी को जमीन के दस्तावेजों में दर्ज कई विक्रेताओं की पहचान पर भी संदेह है। चार्जशीट के मुताबिक, कई कथित विक्रेताओं को उनके दर्ज पते पर नहीं पाया गया। स्थानीय लोगों ने भी उनमें से कई की पहचान करने से इनकार किया। इसके आधार पर सीआईडी को आशंका है कि दस्तावेजों में विक्रेताओं के तौर पर काल्पनिक नाम और पते का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि स्थानीय लोग लंबे समय से इस जमीन पर खेती कर रहे थे, लेकिन 2021 के बाद उन्हें कथित तौर पर जबरन वहां से हटा दिया गया।

सुमित के खाते में सात करोड़ रुपए जमा होने का दावा

चार्जशीट में सीआईडी ने उल्लेख किया है कि वर्ष 2018 से 2021 के बीच सुमित रॉय के एक सरकारी बैंक खाते में करीब सात करोड़ रुपए जमा हुए। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान सुमित इन रकम के स्रोत के बारे में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। इस मामले में सुमित को पहले सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मिली थी। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुमित को मिली सुरक्षा हटा दी। सीआईडी का आरोप है कि आर्थिक लेनदेन से जुड़े सवालों पर सुमित बार-बार जवाब देने से बचते रहे। सुरक्षा कवच हटने के बाद सीआईडी ने कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास से सुमित रॉय को गिरफ्तार किया। फिलहाल वह जांच एजेंसी की हिरासत में हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।