8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक नशा’

कांवरिया यात्रा करने वालों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प-राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश के उद्गार
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कोलकाता

•

image

Shishir Sharan Rahi

•

Updated: 31 Jul 2018, 10:59 PM IST

kolkata

‘आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक नशा’

कोलकाता. नशा और व्यसन रूपी कीड़े से मानव समाज खोखली हो रही है। आतंकवाद से अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है नशा। आतंकवादी तो कभी-कभी हमला करते हैं पर नशा लाखों जनता को अकाल मौत का शिकार बना कर मौत के घाट उतार देता है। विश्व का कोई भी धर्म नशा अपनाने की इजाजत नहीं देता। राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने मंगलवार को कांवडिय़ों को संबोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किए। कांवरिया यात्रा करने वालों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया। मुनि ने कहा कि नशा लोगों को रोगों का शिकार बनाता है और पैसे की बर्बादी होती है। यह पर्यावरण, स्वास्थ्य और आर्थिकता के लिए भी घातक है। अगर युवा पीढ़ी नशे में तबाह हो गई, तो देश की आजादी खतरे में पड़ सकती है। मुनि ने सरकार की दोहरी नीति पर प्रहार करते कहा कि एक ओर वह नशामुक्ति का ढोंग करती है और दूसरी तरफ लाइसेंस देती है। गुटके के उपयोग पर प्रतिबंध लगाती है तो फिर उत्पादन पर क्यों नहीं? नशीली वस्तुओं की बिक्री का लाइसेंस देकर जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए सरकार संविधान की धज्जियां उड़ा रही है। संविधान में जनता के स्वास्थ्य रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। धूम्रपान विधायक मजाक बनकर रह गया है। मुनि ने सरकार से पूछा कि कुंभ मेले में क्या धूम्रपान कानून का पालन होगा? उन्होंने नशे से होने वाली हानियों का उल्लेख स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया ताकि आने वाली पीढ़ी को बचाया जा सके। मुनि ने सभी धर्माचार्यों से नशा मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया। धर्म की ओट में नशे को महामंडित करने वालों को बेनकाब करना होगा। सरकारों को ऋण मुक्ति से पहले नशा मुक्ति अभियान चलाना चाहिए, नहीं तो नशा युक्त लोगों को सहायता देना होते मटके में अमृत भरने के समान है। बीमारी बुराई और अपराध की जननी नशा है। बिहार सरकार की भांति सभी राज्य सरकारों को शराबबंदी कानून बनाने पर जोर दिया। कौशल मुनि ने मंगलाचरण और घनश्याम मुनि ने विचार व्यक्त किए।