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Atmanand School: फ्री एजुकेशन पर ब्रेक! आत्मानंद स्कूलों में अब सालाना 1500 रुपए की फीस, अभिभावकों में निजीकरण की है चर्चा

Atmanand School: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया बदलाव चर्चा में है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों में अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों से सालाना 1500 रुपए शुल्क लेने की बात सामने आई है।

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आत्मानंद विद्यालय (फोटो सोर्स- पत्रिका)

आत्मानंद विद्यालय (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Atmanand School: प्रदेश सरकार ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों से 1500 रुपए वार्षिक शुल्क लेने का निर्णय लिया है। शासन स्तर पर इस संबंध में जानकारी प्रदान की गई है। जिला स्तर के अधिकारी फिलहाल आदेश नहीं मिलने की बात कह रहे हैं।

रायपुर में आयोजित प्राचार्यों की समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस बात की जानकारी दी थी। इस घोषणा के बाद तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं। पूर्व में डॉ. रमन की सरकार में मॉडल स्कूल शुरू किए गए थे। बाद में इसे संचालित करने की जिम्मेदारी डीएवी प्रबंधन को सौंप दिया गया था।

अब, जब स्वामी आत्मानंद स्कूल में फीस लेने की शुरुआत हो रही है, तो अभिभावकों के मन में यह सवाल भी है कि क्या स्वामी आत्मानंद स्कूलों का भी निजीकरण होगा? वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गरीब, वंचित और मध्यम वर्गीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने के लिए आत्मानंद योजना शुरू की थी।

प्रदेश में 751 स्कूल संचालित

प्रदेश में 751 स्कूल संचालित हैं। जहां बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म और शिक्षा पूरी तरह मुफ्त मिलती है। शिक्षा मंत्री की घोषणा के अनुसार 9वीं से 12वीं तक के छात्रों से साल में एक बार 1500 रुपए की फीस ली जाएगी। स्कूलों का अनुदान बढ़ाने की भी बात की गई है।

निजीकरण की है चर्चा

स्वामी आत्मानंद स्कूल कांग्रेस सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसे भूपेश सरकार के कार्यकाल में खड़ा किया गया। इसके पहले छत्तीसगढ़ में जब डॉ रमन सिंह की सरकार थी, तब मॉडल स्कूल खोले गए थे। प्रत्येक विकासखंड में एक मॉडल स्कूल खोला गया था। यहां निशुल्क अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा छात्रों को प्रदान की जाती थी। इन स्कूलों में प्रवेश पाने के लिए भी काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। लेकिन बाद में इन सभी स्कूलों को डीएवी प्रबंधन को सौंप दिया गया था।

मॉडल स्कूल अब मुख्यमंत्री डीएवी स्कूल के नाम से जाने जाते हैं। आत्मानंद स्कूलों में फीस लेने की बात सामने आई है, तभी से अभिभावकों में यह चर्चा है कि इन स्कूलों का हाल भी मॉडल स्कूलों की तरह ना हो जाए।

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