
कोरबा . अप्रैल महीना के साथ ही सूर्य की तपिश लोगों को चुभने लगी है। लोगों का गर्मी से हाल बेहाल होने लगा है। समस्या तब और भी गहरा जाती है जब लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। एसईसीएल स्थित पोखरी वर्षों से लोगों की प्यास बुझाते आ रही है। वर्तमान में भी यहां से मानिकपुर कालोनी में पानी की सप्लाई की जाती है, साथ ही आसपास के क्षेत्र व बस्तियों में रहने वाले लोग इस पोखरी के पानी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पोखरी की साफ-सफाई नहीं होने से यहां गंदगी का अंबार है। गटर का गंदा पानी मिलने से पानी में कई तरह के कीटाणु पनप रहे हैं। इससे कालोनीवासियों के घरों में पहुंचने वाला पानी भी गंदगी के कारण पीने युक्त नहीं है। लोग इसी गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं। एसईसीएल प्रबंधन व प्रशासन भी इसकी सफाई को लेकर गंभीर नहीं हैं।
घाट तो बना है पर सफाई नहीं
पोखरी के चारों ओर निस्तारी के लिए घाट तो बना दिए गए हैं। लेकिन सफाई नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नाले का गंदा पानी पोखरी में मिलने से पानी को और भी दूषित कर रहा है। प्रतिमा विसर्जन के लिए लोग इसी पोखरी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके बाद सफाई करना भूल जाते हैं। इससे गंदगी पसरी हुई है। चारों ओर काई से भरी हुई घास है।
जर्जर पाइप
कालोनियों में पानी सप्लाई के लिए फिल्टर प्लांट तो लगाया गया है, लेकिन वह भी मरम्मत की बाट जोह रहा है। पाइप पर जंग लगा हुआ है। इसकी सफाई पर भी एसईसीएल प्रबंधन का ध्यान नहीं है। लोगों का कहना है कि यह पोखरी काफी समय से हमारी प्यास बुझाता आया है, लेकिन आज यह हमारी प्यास नहीं बुझा पा रहा है। इसका कारण प्रशासन की अनदेखी है। हमें निस्तारी के लिए हैण्डपंप के सहारे रहना पड़ता है, गर्मी बढऩे के साथ ही हैण्डपंप से पानी आना बंद हो जाता है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पहले इसी पोखरी के पानी का इस्तेमाल, नहाने व धोने व पीने के लिए किया करते थे। उस समय पानी काफी साफ हुआ करता था लेकिन वर्तमान में सफाई का अभाव है। नहाने-धोने के लिए भी कई बार सोचना पड़ता है।
क्या कहते हैं लोग
सफाई के बारे में पूछे जाने पर रोहित कुर्रे ने बताया कि वर्तमान में पोखरी का पानी बहुत ही गंदा हो गया है। गर्मी के दिनों में निस्तारी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शासन-प्रशासन को इसकी सुध लेनी चाहिए- रोहित कुर्रे, क्षेत्रवासी
पोखनी के चारों ओर बस्तियां बन गई है। ये बस्तीवासी इसी पानी का उपयोग निस्तारी के लिए करते हैं, लेकिन पानी साफ नहीं होने के बावजूद भी इसका इस्तेमाल करते हैं। इससे बीमारी का खतरा बना हुआ है- दूजेराम सोनवानी, क्षेत्रवासी
पूर्व में नाले का शुद्ध पानी पोखरी में आकर मिलता था, लेकिन आज उसी नाले से गटर का गंदा पानी पोखरी में मिल रहा है। इससे विभिन्न प्रकार के कीटाणु पैदा हो रहे हैं। गटर का गंदा पानी निकासी के लिए अलग से व्यवस्था होनी चाहिए- देव लहरे, क्षेत्रवासी
Updated on:
12 Apr 2018, 8:33 PM IST
Published on:
12 Apr 2018, 8:03 PM IST
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