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AI ने बताया 15 साल बाद कैसा दिखेगा कोटा, ‘कोचिंग सिटी होगी टूरिज्म और IT हब’, देखें 2040 के विकसित कोटा की तस्वीर

Kota From AI View: कोटा की इस यात्रा को नई ऊंचाई देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित हैं, जो आने वाले वर्षों में इसे देश के सबसे विकसित शहरों में शुमार करेंगे।

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कोटा

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Akshita Deora

Mar 12, 2025

Rajasthan Patrika Kota Edition 40th Foundation Day: पहले उद्योग, फिर कोचिंग और अब पर्यटन के क्षेत्र में बूम देख रहा कोटा आगामी वर्षों में विकास के नए शिखर को छुएगा। अनगिनत संभावनाओं में छिपे कोटा के भविष्य के बारे में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआइ ने पड़ताल की। कोटा के विकास के सारे चरण जानने के बाद एआइ रिपोर्टर ने आगामी 2040 में कोटा के विकास का खाका खींचा।

कोटा, जिसे अब तक कोचिंग सिटी और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है, 2040 में एक नई पहचान के साथ उभरेगा। समय के साथ बदलते हुए, यह शहर न केवल शिक्षा का गढ़ रहेगा, बल्कि स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और इंडस्ट्री के नए केंद्र के रूप में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएगा। कोटा की इस यात्रा को नई ऊंचाई देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित हैं, जो आने वाले वर्षों में इसे देश के सबसे विकसित शहरों में शुमार करेंगे।

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इनोवेशन-टेक्नोलॉजी हब

‘मैं कोटा हूं…हर बार उठ खड़ा हुआ हूं…’ इस विचारधारा के तहत कोटा ने हमेशा हर चुनौती को स्वीकार किया है और आगे बढ़ा है। अब तक इस शहर ने अनगिनत परिवर्तन देखे हैं, लेकिन अब यह शहर खुद को और अधिक उन्नत करने के लिए तैयार है। 2040 का कोटा सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीक और विकास की एक नई परिभाषा होगा।

AI की फॉरकास्ट कोटा का भविष्य उज्ज्वल…

कोटा 2040 की परिकल्पना केवल एक सपना नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत और सशक्त शहर की ओर बढ़ने का वादा है। यहां का हर नागरिक इस विकास का गवाह बनेगा और इसमें अपनी भूमिका निभाएगा। कोटा के भविष्य की यह झलक न केवल यहां के निवासियों को गर्व महसूस कराएगी, बल्कि इसे पूरे देश के लिए एक आदर्श शहर बनाएगी। कोटा ने हमेशा अपने साहस, संकल्प और संघर्ष से खुद को साबित किया है। यह शहर आगे भी हर चुनौती को पार कर नए मुकाम हासिल करेगा। 2040 का कोटा, एक ऐसा शहर होगा, जो तकनीक, शिक्षा, उद्योग और पर्यटन का आदर्श केंद्र बनकर देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

कोटा का इन्फ्रास्ट्रक्चर: स्मार्ट हाई-फाई सिटी की ओर कदम

कोटा के भविष्य की नींव मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रखी गई है। शहर को हाईटेक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।

ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और एरो सिटी : नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जोड़ेगा। शंभूपुरा में 700 बीघा जमीन पर बनने वाली हाई-फाई एरो सिटी इसे हाईटेक बिजनेस और रेजिडेंशियल हब में बदल देगी।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ाव: हाईवे टनल कोटा को नई औद्योगिक और व्यापारिक संभावनाओं से जोड़ने में सहायक होगी।

स्मार्ट रेलवे स्टेशन : कोटा जंक्शन और उपनगरीय डकनिया रेलवे स्टेशन पूरी तरह हाईटेक, अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा। डकनिया के विकसित होने से मुख्य स्टेशन का भार घटेगा।

रिंग रोड, कृष्ण गमन पथ: सड़क परियोजनाएं यातायात को सुगम बनाएंगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी।

गारबेज फ्री सिटी : पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने के लिए नई रणनीति के तहत कचरा मुक्त शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।

उद्योग और व्यापार: नई संभावनाओं का केंद्र

कोटा उद्योग के लिए भी नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा। गोपालपुरा में प्रस्तावित नए इंडस्ट्री हब में टॉय पार्क बनेगा। यहां खिलौना बनाने वाली यूनिट्स लगेंगी।

एनर्जी हब: सौर और पवन ऊर्जा का हब बनाने के लिए कोटा में बड़े स्तर पर इन्वेस्टमेंट किया जाएगा।

एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री: कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर कोटा को एग्रो इंडस्ट्री का केंद्र बनाया जाएगा।

दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: इससे कोटा को व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।

भारत मंडपम की तर्ज पर ऑडिटोरियम : दशहरा मैदान में भव्य ऑडिटोरियम विकसित किया जाएगा। यह बड़े आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल बनेगा।

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टूरिज्म से बनेगी नई पहचान

कोटा पर्यटन व नवाचार का नया केन्द्र बनेगा।

टूरिस्ट और वेडिंग डेस्टिनेशन: टूरिस्ट और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभरेगा। रिवर फ्रंट, ऑक्सीजोन के साथ कई खूबसूरत लोकेशन होंगी।

मुकुंदरा रिजर्व: बाघों की संख्या में वृद्धि होने से आकर्षण का नया केंद्र बनेगा। पर्यटक यहां जंगल और वाटर सफारी दोनों का आनंद ले सकेंगे।

चंबल क्रूज: चंबल में क्रूज से पर्यटन को नया आयाम दिया जाएगा।

साइंस एंड इनोवेशन हब: विज्ञान और नवाचार का केंद्र बनाने के लिए अनुसंधान केन्द्र स्थापित होंगे।

ई-बसें और ग्रीन एनर्जी: परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए ई-बसें चलाई जाएंगी।

कोचिंग के बाद एजुकेशन सिटी : रानपुर में एजुकेशन सिटी और विश्वकर्मा स्किल इंस्टीट्यूट बनेगा।

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कोटा की इकोनॉकी का एक्सप्रेस-वे

भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे से कोटा की इकोनॉमी लम्बी छलांग लगाएगी। करीब 15 से 20 हजार करोड़ सालाना टर्नओवर जुड़ जाएगा। कोचिंग इंडस्ट्री का सालाना टर्नओवर भी लगभग इतना ही है। यानी कोटा की अर्थव्यवस्था को सैकंड ऑप्शन मिल जाएगा।