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कोटा के प्राइवेट स्कूलों में कमीशन का खेल: प्रार्थना से पहले बच्चों को आदेश, पेरेंट्स से बोलना, ड्रेस और कॉपी-किताबें इसी दुकान से खरीदें

निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की पुस्तकों में 33 प्रतिशत कमीशन का पकड़ा गया है।
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कोटा

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Zuber Khan

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Updated: 7 Apr 2018, 10:14 AM IST

Commission in Book

कोटा . निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की पुस्तकों में 33 प्रतिशत कमीशन का पकड़ा गया है। जिला कलक्टर के निर्देश पर जिला परिषद के एसीईओ, जिला शिक्षा अधिकारी व तहसीलदार-भू अभिलेख की संयुक्त तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

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'राजस्थान पत्रिका ने 29 मार्च को 'कमीशन के बोझ से भारी होता बैग शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला कलक्टर ने जिला परिषद के एसीईओ मुरारीलाल वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक एंजिलिका पलात व तहसीलदार भू-अभिलेख की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने 3,4 व 5 अप्रेल को तीन दिन तक शहर के नामी स्कूल, दुकान व बुक स्टोर को खंगाले और वहां से रिकॉर्ड जब्त किया। 87 पन्नों की फाइल तैयार की गई है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जिला कलक्टर को सौंप दी गई।

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प्रार्थना, क्लास व एसेम्बली में देते जानकारी
पहला दिन: जांच टीम पहले दिन शहर के तलवंडी, इन्द्रविहार, बारां रोड और डीसीएम रोड स्थित निजी स्कूल पहुंची। यहां क्लास रूम में बच्चों, अभिभावक व स्कूल प्रशासन से बातचीत की। बच्चों ने टीम को उन्हें प्रार्थना, क्लास व एसेम्बली में पुस्तकें एक ही व ड्रेस भी एक ही दुकान से खरीदना बताने की जानकारी दी। अभिभावकों ने बताया कि पुस्तकों व डे्रस के लिए उन्हें स्लिप थमाई जाती है कि फलां दुकान से ही खरीदें।

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बुक स्टोर व दुकान से रिकॉर्ड जब्त
दूसरा दिन: जांच कमेटी दूसरे दिन बल्लभबाड़ी और स्टेशन स्थित दुकानों पर पहुंची। यहां दुकानदारों से निजी स्कूलों की संचालित पब्लिशनर्स की पुस्तकों का रिकॉर्ड लिया। बुक डिपो पर पुस्तकें खरीदते हुए अभिभावकों की भीड़ का फोटो खींचा। कमेटी ने माना कि इन दुकानों पर स्कूलों की मनमानी दरों पर पुस्तकें बेची जा रही हैं। वर्क बुक भी ज्यादा पाई गई। स्कूलों के नामों से प्रिंटेड कॉपियां बेचना पाया गया। वहीं स्कूलों में सूचना पट्ट पर पुस्तकों की दरें, पब्लिशर्स लेखक व तीन दुकानों का नाम लिखा होना चाहिए, लेकिन नहीं मिला। नियमानुसार स्कूलों के नामों की प्रिंटेड कॉपियां नहीं बेच सकते हैं।

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जांच रिपोर्ट में ये सिफारिशें भी....
-सभी स्कूलों के पुस्तकों का मूल्य एक होना चाहिए।
-वर्क बुक कम होनी चाहिए।
-पुरानी पुस्तकें प्रचलन की अनुमति होनी चाहिए।
-ड्रेस व पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए दुकानों का ऑक्शन हो।

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