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chinese technology की हवा नि‍कली, कालीसि‍ंध थर्मल में बनना बंद हुई बि‍जली

कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट आधुनिक chinese technology पर बना राजस्थान का पहला पावर प्लांट है।  
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कोटा

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Zuber Khan

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Updated: 3 May 2018, 11:42 PM IST

jhalawar thermal power plant

झालावाड़. जिले का कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट आधुनिक chinese technology पर बना राजस्थान का पहला पावर प्लांट है लेकिन दूसरी यूनिट दो साल आठ माह में ही जवाब दे गई। इससे कर्मचारी सहित उच्चाधिकारी भी हतप्रभ हैं और यूनिट के सही होने को लेकर एजेसियों से संपर्क कर रहे हैं।

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कुछ एजेंसियों से कोटेशन भी लिए जा रहे हैं लेकिन इतने कम समय में इसके खराब होने से अति आधुनिक तकनीक पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 600 मेगावाट का पहला थर्मल है जो आधुनिकतम चायनीज तकनीक पर बना हुआ है। इसमें बीजीआर कंपनी द्वारा डोंग-फोंग कपंनी का जनरेटर, टरबनाइन, बायलर सहित कई उपकरण लगाए है।

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अब चीनी इंजीनियरों के भरोसे
दूसरी यूनिट को शुरू हुए 2 वर्ष 8 माह 12 दिन ही हुए थे कि 7 अप्रेल को बड़ी तकनीकी खामी आ गई। खराबी भी ऐसी की अभी तक पता नहीं चला कि आखिर क्या हुआ है। कितने दिन लग सकते हैं। जानकारों ने बताया कि अभी तीन महीने सही होने में लग सकते है। ऐसे में अगर टरबाइन सहित अन्य उपकरणों को अगर चीन के इंजीनियरों के पास ले जाना पड़ा तो कई दिनों का समय ले जाने में लगेगा। हालांकि जानकारों का मनाना है कि जनरेटर की बाइंडिंग जल गई है। इसके लिए भेल, डोंग-फोंग आदि कंपनियों के एक्सपर्ट को भी बुलाया गया है।

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क्या हो रहा नुकसान
जानकारों का कहना है कि यदि विदेशी कंपनी की बजाए देश में मौजूद भेल जैसी नामी कंपनियों से थर्मल का काम कराया होता तो कोई भी तकनीकी खामी आने पर इनता खर्चा नहीं होता तथा समय की भी बचत होती।

सक्षम एजेन्सियों से कर रहे बात
कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट चीफ इंजीनियर डीपी वर्मा ने बताया कि सक्षम एजेन्सियों से बात कर रहे हैं। क्या नुकसान हुआ है यह देख रहे हैं। क्या-क्या लगेगा यह देखने के बाद ही पता चलेगा, मैटेरियल आदि के लिए कंपनियों के साथ टैंडर निकाले जाएंगे।