आज भी खरंजे
गांवों में पहले खरंजे ही बनाए जाते थे, ताकी बेलगाडिय़ां उस पर से आसानी से निकल सकें। वही स्थिति आज भी है। गली नम्बर 8 व 9 में जनता आज भी सड़क के लिए तरस रही है। इसके साथ ही रोड लाइटें नहीं होने से भी रात को गिरने का भय बना रहता है। कई लोग गिर भी
चुके हैं।