ऊषा दाधीच और प्रहलाद का ऑफर इतना अट्रेक्टिव था कि लोग आसानी से उनके जाल में फंस गए। ज्यादा से ज्यादा कमाई के चक्कर में एक आदमी ने 4-4 रजिस्ट्रेशन करवा डाले, लेकिन 14 अप्रेल 2004 को लोगों को पहली बार पता चला कि वह ठगी का शिकार हो गए हैं। इस दिन नयापुरा निवासी विक्रम सिंह गहलोत ने गुमानपुरा थाने में प्रहलाद बिहारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसने 4 खाते खुलवाकर 26000 रुपए कम्पनी के नाम से जमा करवाए, लेकिन पैसा लौटाए बिना ही कंपनी फरार हो गई। इसके बाद तो ठगी के इस मामले में कोटा ही नहीं दिल्ली और नोएडा तक करीब 50 एफआईआर दर्ज हुईं। जिसमें लोगों ने 50 से 60 हजार रुपए तक की ठगी की बात कही। अकेले गुमानपुरा थाने में ही 18 मामले दर्ज हुए।