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BIG News: यहां हर साल बारिश में दफन हो जाते हैं किसानों के अरमान और बच्चों के सपने

Farms submerged : कोटा जिले की सांगोद तहसील क्षेत्र में सड़क किनारे खेतों में बरसात का पानी भरा रहता है। इससे फसलें गलकर नष्ट हो जाती है।
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कोटा

•

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Zuber Khan

•

Aug 03, 2019

Farms submerged

BIG News: यहां हर साल बारिश में दफन हो जाते हैं किसानों के अरमान और बच्चों के सपने

सांगोद. सांगोद तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बरसाती पानी ( Heavy Rain) के भराव से खेतों में ( Farms submerged ) खड़ी खरीफ की फसलें तबाह हो जाती है। ( Damage growing crops ) किसान सालभर कड़ी मेहनत व कई तरह की परेशानियों से जुझता हुआ फसल करता है। फसल अच्छी होने पर अच्छे दामों की उम्मीद पर बच्चों के सपने पूरे करने की ख्वाहिश दिल में संजोय रखता है लेकिन बरसात उसके अरमानों पर पानी फेर देती है। यहां सैंकड़ों खेत बरसाती पानी से लबालब हो जाते और पानी की निकासी नहीं होने से फसलें गल जाती है। इससे फसलों को नुकसान तो होता ही है। साथ ही बच्चों के सपनों को पूरा करने की हरसते भी अधूरी रह जाती है। हर वर्ष ऐसी समस्याओं से अन्नदाता को गुजरना पड़ता है।

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कुछ जगह तो हालत यह है कि जमीन उपजाऊ होने के बावजूद किसान रबी की फसल ही ले पाते हैं। ऐसा ही हाल बोरीना पंचायत क्षेत्र का है। बोरीना पंचायत के कुदैत निवासी बद्रीलाल गोचर के दो बीघा का खेत है जिससे वह सालभर अपने परिवार की आजीविका चलाता है। इस दो बीघा खेत में भी उसे साल में सिर्फ एक बार ही फसल मिलती है। खरीफ की फसल बारिश का पानी खेत में भरने से खराब हो जाती है। रबी की फसल के भरोसे उसे साल भर अपने परिवार का गुजारा चलाना पड़ता है। यह अकेले बद्रीलाल की ही नहीं वरन क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की पीड़ा है। जानकारी के अनुसार खेतों में पानी भराव ( Farms submerged with Rain Water ) की यह समस्या गांवों में सड़कें बनाने के बाद ज्यादा हुई है। सड़कों की ऊंचाई खेतों से ज्यादा होने एवं बारिश ( Heavy Rain) के पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से सारा पानी सड़क किनारे के खेतों में भर जाता है। इससे किसान खरीफ की फसलों में नुकसान उठाने को मजबूर हैं।

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राह आसान, लेकिन खेती में मुश्किल
क्षेत्र में एक दशक में सड़कों का जाल बिछने से ग्रामीणों की आवागमन की राह तो आसान हो गई लेकिन सड़कों की ऊंचाई बढऩे से सड़क किनारे के खेतों में पानी भराव की समस्या बढ़ गई। इससे किसान हर साल आर्थिक नुकसान उठाने को मजबूर हैं।

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नहीं होती पानी की निकासी
बारिश के दौरान खेतों में चरागाह एवं वन भूमि से बहकर काफी पानी आता है। पहले खेतों तक या आस-पास सड़कें नहीं होने से बारिश का सारा पानी प्राकृतिक मार्गो से बहकर बरसाती नालों के जरिए नदियों में मिल जाता था। अब गांवों में जगह-जगह सड़कें बन गई। बरसाती पानी की निकासी के प्राकृतिक मार्ग बंद होने से बारिश के बाद सारा पानी सड़क किनारे के खेतों में भर जाता है। जिससे फसलें खराब हो जाती हैं।

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डूब जाती है फसलें
क्षेत्र में हजारों किसान हैं जो इस समस्या से परेशान हैं। बारिश होती है तो किसानों की चिंता बढ़ जाती है। खेतों में बीजों की बुवाई भी करते हैं, लेकिन बारिश में हजारों बीघा की फसलें डूब जाती हैं। अधिकारियों से लेकर नेताओं तक गुहार लगाने के बावजूद समाधान नहींं होता। ऐसे में हर साल किसानों को खरीफ की फसलों में नुकसान उठाना पड़ता है। ज्यादा परेशानी निम्न तबके के किसानों को उठानी पड़ती है।

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मुआवजे का प्रावधान नहीं
सड़कों की ऊंचाई बढऩे, बारिश के पानी की निकासी के प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध होने से खेतों में बारिश का पानी भरा रहता है। ऐसे कई किसान मुआवजे की उम्मीद में समस्या लेकर भी आते हैं। अधिक बारिश से फसल खराब होती है तो उसमें मुआवजे का प्रावधान रहता है, लेकिन इस तरह के मामलों में कोई मुआवजा देय नही हैं।
ओम प्रकाश सिंघल, कृषि अधिकारी सांगोद