
मां को देख छलके आंसू (फोटो: नीरज पत्रिका)
Monday Motivation Story Of Arundhati Choudhary: नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स-2025 में महिला कैटेगिरी के 70 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर अरुंधति चौधरी रविवार को कोटा लौटी। रेलवे स्टेशन पर परिजन और शहरवासियों ने ढोल-नगाड़ों और फूलमालाओं से उनका स्वागत किया। बाहर आते ही पिता सुरेश चौधरी ने अरुंधति का गले लगकर स्वागत किया। जिसके बाद कार में लकवा पीड़ित बीमार मां से गले मिलकर बेटी भावुक हो गई।
Q स्वर्ण पदक जीतना कितना खास रहा?
अरुंधति: पिछले दो साल से गंभीर इंजरी से जूझ रही थी। कलाई में फ्रैक्चर, एंकल इंजरी और पहले हेड इंजरी भी हुई थी। इन सब से पार पाते हुए गोल्ड जीतना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है।
Q बड़ा संघर्ष क्या रहा?
अरुंधति: सबसे बड़ा संघर्ष मेरी मां की लगातार खराब तबीयत और उससे हुआ मानसिक तनाव व दबाव था। इसके बावजूद मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी। कोच और परिवार के साथ ने मुझे मजबूती दी। पूरा कोटा मेरा हौसला बढ़ा रहा है, यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
Q मुक्केबाजी सफर की शुरुआत कैसे हुई?
अरुंधति: मैंने 2016 में बॉक्सिंग शुरू की। मेरे पापा पूरे भारत में घूमे और उसके बाद मुझे पर्सनल ट्रेनर अशोक गौतम के पास लगाया। दो साल तक पूरी ट्रेनिंग उन्हीं से ली।
Q उपलब्धियां में क्या खास है?
अरुंधति: 2021 यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग स्वर्ण पदक, 2018 में एशिया की बेस्ट जूनियर बॉक्सर व 7 अंतरराष्ट्रीय व 7 राष्ट्रीय स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
Q आपका अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
अरुंधति: मेरा अगला लक्ष्य 2026 एशियन गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
Updated on:
24 Nov 2025 02:12 pm
Published on:
24 Nov 2025 02:09 pm
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