
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोटा को लघु भारत की संज्ञा दे चुके हैं
कोटा. मेडिकल और इंजीनिरिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए कोटा देशभर में खास जगह बनाने में इसलिए कामयाब हुआ इसका कारण भी खास है। यहां पढ़ाई के साथ बेहतर कॅरियर प्लानिंग होती है। लॉकडाउन (Lockdown) में भी कोटा को पूरे देश में याद किया जा रहा है। विद्यार्थी और अभिभावक अभी भी फोन पर यह पूछ रहे हैं कि कोटा में कब से क्लास रूप पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। अभी भी कोटा की एक ही कोङ्क्षचग में करीब 90 हजार बच्चों ने पंजीकरण कराया है। ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। उन्हें हालात सामान्य होने का इंतजार है। कई कोचिंग संस्थान ऑलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। इस तरह सवा लाख से ज्यादा बच्चे अभी भी कोटा से जुड़े हैं।
हर वर्ष इंजीनिरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में ऑल इंडिया टॉप रैंक कोटा में पढऩे वाले बच्चों की आती है। एम्स परिणामों में टॉप 10 में सभी रैंक भी कोटा के नाम रह चुकी हैं। हर राज्य से स्टूडेंट यहां आकर तैयारी करते हैं। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में खुले दिल से कहा था कि, कॅरियर बनाने की बात आती है तो देशभर के अभिभावक कोटा को याद करते हैं। कोटा में रहकर बच्चे पढ़ते हैं और आगे बढ़ते हैं। एक तरह से कोटा लघुभारत बन गया है।
अमेरिका में वैज्ञानिक के रूप में सेवाएं दे रहे हेमेन्द्रपाल ने बताया कि दसवीं पास करने के बाद कोटा तैयारी करने गए। वहां पढ़ाई करने के बाद आईआईटी मुंबई तक पहुंचे और अब विदेश में अपनी पंसद का काम करने का मौका मिला है। वे कोटा को नहीं भूल सकते। वे कई संस्थानों में पढ़े, लेकिन कोटा क्लारूम जैसी शैली कहीं नहीं मिला।
ऐसे तैयार होती है फैकल्टी
यहां शिक्षकों को तैयार करने के लिए 2 साल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद डाउट काउंटर, मेंटरशिप की प्रेक्टिस के बाद क्लास के लिए फैकल्टीज तैयार होती है।
विदेश तक धाक है
कोटा का वातावरण बहुत ही शांत, स्वस्थ और सुरक्षित है। यही कारण है कि कश्मीर से कन्या कुमारी और पूर्वोत्तर से पश्चिम तक के स्टूडेंट्स यहां आकर पढ़ते हैं। यही नहीं नेपाल, अफगानिस्तान, दुबई, सहित कई देशों से भी स्टूडेंट्स यहां आकर पढ़ते हैं।
कोटा का कोई मुकाबला नहीं हैमैने अपने बेटे को कोटा में कोचिंग (kota coaching) कराई। इस दौरान यहां दो साल रहने का मौका लिया। कोटा में पढ़ाई का वातवरण बहुत अच्छा है। वहां लोग भी बहुत अच्छे हैं। विद्यार्थियों की अच्छी तरह केयर करते हैं। बेटे का आईआईटी में प्रवेश के लिए चयन हो गया और मनपंसद ब्रांच भी मिल गई। अब वापस दिल्ली आए, लेकिन कोटा हमेशा यादों में है। कोटा सपनों को पूरा करने वाला शहर है। इसलिए देशभर के बच्चे वहां आते हैं।
प्रो . चारूश्री, दिल्ली, अभिभावक
कोटा क्लास रूम की पढ़ाई अव्वल
कोटा में दो साल रहकर पढ़ाई की, वहां क्लास रूम में जिस शैली में पढ़ाया गया वो हमेशा याद रहेगी। क्लासरूम को लेकर कभी तनाव ही नहीं हुआ। इसके साथ ही मनोरंजन और नैतिक शिक्षा पर भी जोर दिया जाता है। कोटा में डॉक्टर, इंजीनियर ही नहीं बनाया जाता है वहां मानवीयता भी सिखाई जाती है। कोटा में जो पढ़ाई स्किल सीखा वह अभी भी काम आ रहा है।
वर्चस्व, तृतीय वर्ष छात्र आईआईटी, कानपुर
याद आ रहा है कोटा
मैं कोटा में नीट की तैयारी करने आई थी और ये मेरा पहला साल है। कोटा में जिस तरह पढ़ाई का माहौल है वैसा कहीं नहीं होगा ऐसा मेरा विश्वास है। कोटा में लॉकडाउन में भी बच्चों का बहुत ध्यान रखा। मैं कोटा से घर आ गई हूं, लेकिन कोटा याद आता है। कोटा में जाकर फिर पढ़ाई करने का मन है। किसी कारण मैं नहीं जा पाई तो मेरे छोटे भाई-बहिन जरूर जाएंगे। कोटा की पढ़ाई के बारे में सुनकर वे भी उत्साहित हैं।-अनम शाजली, छपरा, बिहार
Updated on:
27 May 2020 03:45 pm
Published on:
27 May 2020 03:45 pm
