31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कोटा
अमिताभ की खून-पसीना ने रातों-रात बदली ओम बिरला की किस्मत, मंत्री की कार के आगे लेट गए थे..
Play video

अमिताभ की खून-पसीना ने रातों-रात बदली ओम बिरला की किस्मत, मंत्री की कार के आगे लेट गए थे..

पहले भाषण ने बना दिया था एंग्रीयंग मैन, मल्टीपरपज स्कूल में छात्र अध्यक्ष के रूप में बिरला के जोशीले भाषण से हिल गए थे दिग्गज नेता  
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कोटा

•

image

Rajesh Tripathi

•

Updated: 18 Jun 2019, 9:02 PM IST

कोटा. बात 1977 की है, गुमानपुरा के मल्टीपरपज स्कूल में छात्र संघ का शपथ ग्रहण समारोह था। छात्र संघ अध्यक्ष थे ओम बिरला। बिरला ने माइक संभाला और भाषण देना शुरू किया। मंच पर राजस्थान सरकार के मंत्री भी मौजूद थे। om birla ने पहला भाषण ही ऐसा दिया कि प्रदेश के युवा मुरीद हो गए और कोटा से उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की छेडी़ गई लौ प्रदेश में जल उठी। उस दौर में युवाओं में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा था और कोटा में स्थानीय उद्योगों के बावजूद स्थानीय युवकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा था।

ओम बिरला ने पहले भाषण में युवा शक्ति की नब्ज को टटोलते हुए कहा था कि कोटा के युवा कारखानों की चिमनियों के धुएं का जहर पीते हैं, लेकिन कारखानों में कोटा के युवाओं को रोजगार नहीं मिलता है। कोटा के उद्योगों में युवाओं को रोजगार देना ही पड़ेगा। बिरला के इस भाषण की गूंज पूरे प्रदेश तक गूंजी और युवा वर्ग बिरला का मुरीद हो गया। इसके बाद प्रदेशभर के युवा उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग उठाने लगे। बिरला के साथ युवाओं के जुडऩे से कोटा के दिग्गज नेता भी चिंता में थे। इसके पीछे की कहानी यह है कि बिरला के बड़े भाई राजेश बिरला 1977 की एक रात अमिताभ बच्चन की फिल्म खून पसीना देख कर घर लौट रहे थे। देश भर में युवाओं में बेरोजगारी बड़ी समस्या बन गई थी। राजेश बिरला ने देखा, कोटा में कारखानों को चिमनियां धुआं उगल रही हंै। मन में विचार आया इन चिमनियों का जहर कोटा के लोग सहें और नौकरी बाहर के लोगों को मिले। यह तो अत्याचार है। बस राजेश ने अपने दस साल छोटे भाई को कहा, छात्र संघ अध्यक्ष शपथ ग्रहण कार्यक्रम में इसी विषय पर भाषण दें। इस भाषण ने उन्हें कोटा का तब का एंग्रीयंग मैन बना दिया। राजेश बिरला बताते हैं कि ओम बिरला ने भाषण देने के लिए पूरी रात तैयारी की। कई बार रिहर्सल किया।

मंत्री की कार के आगे लेट गए थे
बिरला के साथ युवाओं की पूरी फौज थी और छात्र राजनीति से काफी सक्रिय थे। कोटा के जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते थे और अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए आंदोलन से भी पीछे नहीं हटते थे। 1977 में कारखानों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था। बिरला ने ऐलान कर दिया था कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो मंत्रियों को शहर में नहीं घुसने देंगे। राजेश बिरला ने बताया कि मैंने महसूस किया कि करीब दस साल की उम्र से ही ओम को राजनीति रास आने लगी थी। वह राजनीतिक चर्चाओं को ध्यान से सुना करता था।

छात्र राजनीति से लोकसभा अध्यक्ष तक का सफर

कोटा. राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला ने छात्र राजनीति से जो सफर शुरू किया था, आज एक बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। कामयाबी के शिखर पर पहुंचने वाले बिरला ने हमेशा जमीनी स्तर पर काम करने का ध्येय रखा। सबको साथ लेकर चलने की रणनीति ही बिरला की सफलता का राज मानी जाती है। बिरला की पहचान जितनी राजनेता के रूप में है, उससे कई ज्यादा सामाजिक कार्यों में मानी जाती है।

बिरला ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुमानपुरा (मल्टीपरपज स्कूल) से की थी। 1977 में पहली बार छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए, इसके बाद बिरला लगातार राजनीति की सफलता के एक-एक पायदान चढ़ते गए। कॉमर्स कॉलेज में भी संयुक्त सचिव रहे।

सरकार ने कह दिया ताला लगा दो, बिरला ने पेश की प्रदेश के लिए नजीर

बिरला के पिता श्रीकृष्ण बिरला सहकारी नेता थे और प्रदेश की सबसे पुरानी कोटा कर्मचारी सहकारी समिति (सभा नम्बर 108) के अर्से से अध्यक्ष हैं। पिता से ओम बिरला ने सहकारी संस्थाओं को कैसे सुव्यवस्थित संचालित करना है, यह सीखा। राज्य सरकार ने कोटा सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार को लगातार घाटे के चलते बंद करने का ऐलान कर दिया। बिरला 1985 में भण्डार के अध्यक्ष बने। उन्होंने अपने कुशल प्रबंधन से दो साल में घाटे में चल रहे भण्डार को लाभ में ला दिया, जो आज भी लाभ में संचालित है। बिरला के सहकारी कॉन्सेप्ट को प्रदेशभर में लागू किया गया। बिरला फिर राजस्थान सहकारी उपभोक्ता भण्डार के और फिर राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ नई दिल्ली के वाइस चेयरमैन बने।

गहलोत की इस खास टीम में पायलट को नहीं मिली
जगह , इन पर जताया भरोसा…

युवा मोर्चा से चमकाई राजनीति
बिरला युवा शक्ति की ऊर्जा को पहचानते हैं। युवा मोर्चा से लेकर आज भी बिरला युवाओं को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। युवा मोर्चा के कोटा के अध्यक्ष रहे। फिर युवा मोर्चा के लम्बे समय तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। इसके बाद मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। इस दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। बिरला के साथ काम करने वाली युवा टीम के नेता आज सरकार और पार्टी में अहम पदों पर है।


पहली बार विधायक बनते ही मिली लालबत्ती

2003 में ओम बिरला कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल को चुनाव हराकर विधायक चुने गए थे। 2004 में संसदीय सचिव बने। संसदीय सचिव के रूप में जन अभाव अभियोग का प्रभार का दायित्व सौंपा गया। बिरला ने प्रदेशभर की जनता की समस्याओं का समाधान करवाकर अपनी पहचान बनाई। खुद बिरला शहरों से लेकर गांवों में जाकर समस्या निवारण शिविर लगाए थे। विपक्ष में विधायक के रूप में सरकार को घेरने में बिरला ने कोई कौर कसर नहीं छोड़ी। विधानसभा में सबसे अधिक सवाल लगाने वाले विधायक रहे।

संसद में खूब उठाई आवाज
2014 में सांसद चुने जाने के बाद बिरला ने कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र के संबंधित खूब सवाल उठाए। प्रदेश के मुद्दों को लोकसभा में उठाने में बिरला का नाम अग्रणी रहा। 2014 में हाड़ौती में हुई भीषण ओलावृष्टि का मुद्दा बिरला ने सदन में प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद तत्कालीन केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली कोटा आए। बिरला किसानों की खराबे की मुआवजा राशि बढ़ाने पर संसद में अड़ गए थे। इसके बाद खुद प्रधानमंत्री ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया था। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाया गया था।

 

नाम: ओम बिरला

पिता: श्रीकृष्ण बिरला

जन्म तिथि : 4 दिसम्बर 1962
विवाह : 11 मार्च 1991

शैक्षणिक योग्यता: स्नातकोत्तर (वाणिज्य)
पत्नी : डा. अमिता बिरला

परिवार : दो बेटियां आकांक्षा और अंजली

 

राजनीतिक सफर
वर्तमान दायित्व : 2019 में 17 वीं लोकसभा में कोटा-बूंदी से सांसद

16 वीं लोकसभा 2014 कोटा-बून्दी से सांसद
2003 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए

2004 को राजस्थान सरकार के संसदीय सचिव (राज्यमंत्री) के पद पर नियुक्त।
2008 में फिर विधायक चुने गए

2013 में तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए।