
केलवाड़ा (बारां).
समरानियां कस्बे के एक निजी स्कूल में गुरुवार को गंभीर हादसा उस वक्त टल गया जब स्कूल की एक शिक्षिका ने तीन वर्षीय एक मासूम बालिका को अनजाने में कीटनाशक का सेवन करने से बचा लिया और मासूम की जान बच गर्ई।
कीटनाशक की गंध के असर से तबीयत बिगडऩे के बाद बालिका को केलवाड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया। बालिका अब स्वस्थ है, लेकिन यह घटना पीछे एक सवाल छोड़ गई कि आखिर पानी की बोतल में कीटनाशक कैसे निकला। बालिका अपने घर से बोतल लाई थी, स्कूल में बोतल को खोला तो पानी की जगह कीटनाशक कहां से आया। बालिका रोजाना ही घर से पानी भरी बोतल लाती थी।
यह है मामला
फरेदुआ निवासी हरिकेश बामनिया ने बताया कि गुरुवार सुबह उसकी तीन वर्षीय बालिका अनुष्का मिनी चिल्ड्रन स्कूल में पढऩे गई थी। बालिका को स्कूल जाने के लिए उसकी पत्नी ने तैयार किया था। पानी की बोतल भी उसकी पत्नी ने ही भरकर दी थी, लेकिन स्कूल में बालिका ने जब लंच के समय बोतल को पानी पीने के लिए खोला तो वह कीटनाशक से भरी हुई थी। उसके असर से बालिका की तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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ऐसे टला हादसा
अनुष्का सभी बच्चों के साथ लंच करने के लिए बैठी थी। उसने जैसे ही बोतल का ढक्कन खोला पूरे कक्ष में कीटनाशक दवा की गंध फैल गई। टीचर शिक्षिका ऋचा मंडल ने तुरंत बालिका को उसे पीने से रोका, जब तक वह कीटनाशक से भरी बोतल को मुंह से लगा चुकी थी। कीटनाशक की गंध से बच्ची की तबीयत बिगड़ गई।
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स्कूल निदेशक अतुल मेहता का कहना है कि बालिका पानी की बोतल खुद घर से लेकर आई थी। बोतल पूरे समय उसके ही पास थी। फिर बोतल में कीटनाशक कैसे आया, यह समझ नहीं आ रहा।
केलवाड़ा के डॉ. जयसिंह मेहता का कहना है कि बालिका के मुंह से जो गंध आ रही थी और बोतल में भरा हुआ कीटनाशक ही था। जिसके सेवन से बालिका की जान जा सकती थी।
Updated on:
18 Nov 2017 06:07 pm
Published on:
18 Nov 2017 05:57 pm
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