
कोटा . एक समय था, तब जागीरदार कहलाते थे। खेतों में सम्पन्नता बरसती थी। जमीन के अंदर पानी क्या खत्म हुआ, तकदीर ही बदल गई। सब कुछ बर्बाद हो गया। पिछले कुछ सालों में बोरिंग से पानी आना बंद हो गया तो उनकी किस्मत ही रूठ गई। पैसा नहीं होने से बेटे का इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं। पानी नहीं होने से यहां की चार ग्राम पंचायतों में किसानों की हालत बदहाली की हो गई है।
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चौमा मालियान पंचायत के बंबोली गांव निवासी बजरंगलाल मीणा के बेटे कुंजबिहारी का कैथून के पास मोटरसाइकिल से एक्सीडेंट हो गया था। जब तक पैसा था इलाज कराया, लेकिन उसके बाद उसे घर ले आए। पहले पानी अधिक था तो खेती अच्छी होती थी, पैसा भी खूब आता था, लेकिन पिछले दो साल से खेती घाटे का सौदा साबित होती जा रही है।
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एक तो खेती नहीं कर पा रहे, वहीं दूसरी ओर बेटे के इलाज में सब कुछ लग गया। 30 लाख रुपए निजी चिकित्सालय में इलाज में लग गए। पिछले 11 माह से वह पलंग पर ही कष्टप्रद जीवन बिता रहा है, न बोल पाता है न समझा पाता है। सिर की तरफ का एक हिस्सा पूरी तरह दब गया है।
बैंकों का कर्ज तो क्या ब्याज भी नहीं चुक रहा
कर्ज चुकाने के लिए जमीन को गिरवी रख दिया। 120 बीघा जमीन बंजर हो गई। पानी बिना सब खत्म हो गया है। बैंकों से जमीन रखकर 60 लाख का कर्ज ले लिया। अब मूल चुकाना तो दूर की बात है, ब्याज तक नहीं चुक रहा है। पूरा घर बर्बाद हो गया है।
Published on:
8 Apr 2018, 12:54 PM IST
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