23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पानी के जख्म: कोई खाने को दे जाए, इसलिए दिनभर दरवाजे पर रहती है निगाहें…

वृद्धा रामधनी की निगाहें दरवाजे पर इसलिए रहती हैं कि कोई आए तो शायद खाने को दे जाए। जीवन गांव में बीत गया, किसी से मांगने में भी शर्म नहीं है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कोटा

•

image

Zuber Khan

•

Updated: 10 Apr 2018, 11:32 AM IST

Water crisis in kota

कोटा . पानी की किल्लत से कोटा जिले के बंबोली गांव बर्बादी की दहलीज पर खड़ा है। यहां बेटियों की डोलियां सिर्फ इसलिए नहीं उठती क्योंकि यहां पानी नहीं है। जो जमीन थी, उसमें पिछले चार सालों से पानी नहीं है। खेती नहीं हो रही तो खाने को भी मुश्किल से मिल रहा है। मजदूरी कर जैसे-तैसे काम चला रहे हैं।

Read More: कोटा के ऐसे 20 गांव जहां न पीने को है और न ही फसल के लिए पानी, 70 हजार बीघा जमीन सूखी, बर्बादी की चौखट पर खड़ा किसान

जमीन में पानी नहीं है, इसलिए उसकी कीमत भी कौडिय़ों के भाव हो गई। बच्चे भी स्कूल छोड़ मजदूरी करने लगे हैं। धीरे-धीरे पूरा गांव वीरान होता जा रहा है। वक्त के साथ-साथ कई सरकारें बदल गई लेकिन गांवों के हालात जस के तस है। कभी नहीं सुधरे। विकास तो दूर, पीने तक को पानी नहीं है।

Read More: कोटा के इस गांव में पानी नहीं उठने देता बेटियों की डोलियां, वीरान हो रहा गांव, स्कूल छोड़ मजदूरी कर रहे बच्चे

चुनाव के समय जनप्रतिनिधि विकास का नारा देते इन विराने में आते हैं, भरोसा व आश्वासन और कोरा वादा कर गांववासियों की आंखों में सुनहरे सपने संजोते हैं, पर समय निकल जाता है लेकिन उनकी मुश्किलों का हल निकलता। यह दास्तां अकेले बंबोली गांव की नहीं है, जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां पानी की बूंद-बूंद को लोग तरस रहे हैं।

Read More: राजस्थान के ऐसे 20 गांव जहां युवकों की नहीं होती शादी, जमीन जायदाद होने पर भी कोई नहीं देता लड़की...वजह जानकर दंग रह जाएंगे आप

खाने की आस में दिनभर दरवाजे पर बैठी रहती है वृद्धा
बंबोली गांव की एक वृद्धा रामधनी की निगाहें दरवाजे पर इसलिए रहती हैं कि कोई आए तो शायद खाने को दे जाए। पूरा जीवन गांव में ही बीत गया तो किसी से मांगने में भी शर्म आती है। एक 47 साल का बेटा है सियाराम, उसकी भी शादी नहीं हुई। 3 बीघा जमीन है, वह बंजर पड़ी है। दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। ऐसे कई परिवार हैं जो आर्थिक दृिष्ट से कमजोर हो चुके हैं। इनकी सुध लेने वाला गांव में कोई नहीं है।

Read More: 30 रुपए को लेकर मचा बवाल, छात्रों ने प्राचार्य को कक्ष में घुसने से रोका...

20 गांव की 70 हजार बीघा भूमि सूखी
कोटा जिले की ग्राम पंचायत चौमा मालियान, भाण्डाहेड़ा, रेलगांव व कुराड़ पंचायतों के करीब 20 गांव की 70 हजार बीघा भूृमि में पानी पालात में पहुंच गया है। फसल के लिए तो दूर अब पेयजल का भी संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान पत्रिका टीम ने 80 किमी क्षेत्र का दौरा कर किसानों के हाल देखे। चार पंचायतें व 20 गांव में सैंकड़ों किसानों से बात की। हालात इतने विकट हैं कि जमीन ही नहीं अब आंखों का पानी भी सूख गया है।

बड़ी खबरें

View All

कोटा

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग