
जमीन में पानी नहीं है, इसलिए उसकी कीमत भी कौडिय़ों के भाव हो गई। बच्चे भी स्कूल छोड़ मजदूरी करने लगे हैं। धीरे-धीरे पूरा गांव वीरान होता जा रहा है। वक्त के साथ-साथ कई सरकारें बदल गई लेकिन गांवों के हालात जस के तस है। कभी नहीं सुधरे। विकास तो दूर, पीने तक को पानी नहीं है।
Read More: कोटा के इस गांव में पानी नहीं उठने देता बेटियों की डोलियां, वीरान हो रहा गांव, स्कूल छोड़ मजदूरी कर रहे बच्चे
चुनाव के समय जनप्रतिनिधि विकास का नारा देते इन विराने में आते हैं, भरोसा व आश्वासन और कोरा वादा कर गांववासियों की आंखों में सुनहरे सपने संजोते हैं, पर समय निकल जाता है लेकिन उनकी मुश्किलों का हल निकलता। यह दास्तां अकेले बंबोली गांव की नहीं है, जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां पानी की बूंद-बूंद को लोग तरस रहे हैं।
खाने की आस में दिनभर दरवाजे पर बैठी रहती है वृद्धा
बंबोली गांव की एक वृद्धा रामधनी की निगाहें दरवाजे पर इसलिए रहती हैं कि कोई आए तो शायद खाने को दे जाए। पूरा जीवन गांव में ही बीत गया तो किसी से मांगने में भी शर्म आती है। एक 47 साल का बेटा है सियाराम, उसकी भी शादी नहीं हुई। 3 बीघा जमीन है, वह बंजर पड़ी है। दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। ऐसे कई परिवार हैं जो आर्थिक दृिष्ट से कमजोर हो चुके हैं। इनकी सुध लेने वाला गांव में कोई नहीं है।
Read More: 30 रुपए को लेकर मचा बवाल, छात्रों ने प्राचार्य को कक्ष में घुसने से रोका...
20 गांव की 70 हजार बीघा भूमि सूखी
कोटा जिले की ग्राम पंचायत चौमा मालियान, भाण्डाहेड़ा, रेलगांव व कुराड़ पंचायतों के करीब 20 गांव की 70 हजार बीघा भूृमि में पानी पालात में पहुंच गया है। फसल के लिए तो दूर अब पेयजल का भी संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान पत्रिका टीम ने 80 किमी क्षेत्र का दौरा कर किसानों के हाल देखे। चार पंचायतें व 20 गांव में सैंकड़ों किसानों से बात की। हालात इतने विकट हैं कि जमीन ही नहीं अब आंखों का पानी भी सूख गया है।
Published on:
10 Apr 2018, 11:32 AM IST
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.