
बंधेज पगड़ी में दिखे Pm Modi/ image credit x.com/BJP4India
Pm Modi Bandhej Pagdi: देशभर में आज बड़े हर्षोल्लास से 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित किया। हर साल की तरह इस बार भी पीएम मोदी का पहनावा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। इस बार पीएम मोदी बंधेज पगड़ी पहने नजर आए, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। ऐसे में आइए जानते हैं, क्या खास है इस पगड़ी में और यह बंधेज कैसे बनाई जाती है।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पीएम मोदी गहरे लाल रंग की बंधेज पगड़ी में दिखे, जिस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे डॉट्स नजर आ रहे थे। ये डॉट्स बंधेज कला की सबसे खास पहचान माने जाते हैं। वहीं लाल रंग को शक्ति, उत्साह और शुभ मौकों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े मौके पर इस तरह की पगड़ी का चुनाव अपने आप में खास है।
पीएम मोदी लंबे समय से देश के स्थानीय सामान और कारीगरों की कला को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं। बंधेज पगड़ी भी इसी लोकल कला की एक पहचान है। इसे पहनकर उन्होंने राजस्थान और गुजरात के उन कारीगरों की कला को सामने लाने का काम किया। बंधेज राजस्थान के साथ-साथ गुजरात की भी प्रसिद्ध पारंपरिक 'टाई-एंड-डाई आर्ट' मानी जाती है।
बंधेज बनाने के लिए कॉटन, जॉर्जेट, शिफॉन और सिल्क जैसे कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। कपड़े को अच्छी तरह साफ करके तैयार किया जाता है, ताकि रंग आसानी से उस पर चढ़ सके।
कपड़ा चुनने के बाद यह तय किया जाता है कि कपड़े पर किस तरह का डिजाइन बनाना है। कारीगर अपनी कला के हिसाब से कपड़े पर निशान लगाते हैं। इन निशानों के आधार पर आगे कपड़े को बांधा जाता है।
डिजाइन के हिसाब से कपड़े के छोटे-छोटे हिस्सों को उठाकर धागे से कसकर बांधा जाता है। इन गांठों की वजह से कपड़े के बंधे हुए हिस्से पर रंग आसानी से नहीं चढ़ पाता।
गांठें बांधने के बाद कपड़े को रंग के घोल में डुबोया जाता है। कपड़े के खुले हिस्से पर रंग चढ़ जाता है, लेकिन जिन हिस्सों को धागे से कसकर बांधा गया होता है, वहां रंग आसानी से नहीं पहुंच पाता।
रंगाई के बाद कपड़े को बाहर निकालकर अच्छी तरह सुखाया जाता है। इस दौरान रंग कपड़े पर अच्छी तरह चढ़ जाता है। कई बार जरूरत के हिसाब से अलग-अलग रंगों की प्रक्रिया भी दोहराई जाती है।
कपड़ा सूख जाने के बाद धागों से बंधी गांठों को खोला जाता है। जैसे-जैसे गांठें खुलती हैं, कपड़े पर छोटे-छोटे सफेद या हल्के रंग के बिंदु दिखाई देने लगते हैं।
आखिर में कपड़े को फैलाकर साड़ी, पगड़ी, साफा, दुपट्टा और दूसरे कपड़े बनाए जाते हैं। हर कपड़े का डिजाइन इस बात पर निर्भर करता है कि कारीगर ने गांठें किस तरह और कितनी जगह पर बांधी हैं।
Updated on:
15 Aug 2026 11:57 am
Published on:
15 Aug 2026 11:53 am
