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नीला, लाल, बैंगनी और हरा पैकेट में आता है दूध, जानिए चारों में अंतर

Milk Packet Colour Code: दूध के पैकेट का रंग अलग-अलग क्यों होता है? जानें टोंड, डबल टोंड, मानकीकृत और फुल क्रीम दूध में क्या अंतर होता है और डाइटिशियन के अनुसार किसे कौन से दूध का सेवन करना चाहिए।
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Toned Milk, Full Cream Milk, Milk Types In India

Milk Packet Colour Code (representative image)image credit gemini

Milk Packet Colour Meaning: दुकान पर दूध खरीदते समय आपने अलग-अलग रंग के पैकेट जरूर देखे होंगे। ऐसे में आपके मन में भी यह सवाल आया होगा कि जब गाय या भैंस एक ही तरह का दूध देती हैं, तो बाजार में दूध की इतनी अलग-अलग किस्में क्यों मिलती हैं? दरअसल, दूध के पैकेट का रंग उसमें मौजूद वसा की मात्रा और दूध की श्रेणी के बारे में बताने में मदद करता है। इससे आप अपनी जरूरत और खान-पान के हिसाब से दूध का चुनाव कर सकते हैं। आइए जानते हैं दूध के अलग-अलग प्रकार और उनमें मौजूद वसा की मात्रा के बारे में।

लाल या बैंगनी रंग का दूध

अगर आप कम वसा वाला दूध पसंद करते हैं, तो लाल या बैंगनी रंग के पैकेट में मिलने वाला डबल टोंड दूध एक विकल्प हो सकता है। इसमें आमतौर पर करीब 1.5 प्रतिशत वसा होती है और यह फुल क्रीम दूध की तुलना में हल्का होता है।

नीले रंग का दूध

नीले रंग के पैकेट में आमतौर पर टोंड दूध मिलता है, जिसमें करीब 3 प्रतिशत वसा होती है। यह रोजाना दूध पीने वालों के लिए एक सामान्य विकल्प हो सकता है। अगर आप दूध से पोषण लेना चाहते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा वसा का सेवन नहीं करना चाहते, तो टोंड दूध को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

हरे रंग का दूध

हरे रंग के पैकेट में आमतौर पर मानकीकृत दूध मिलता है। इसमें करीब 4.5 प्रतिशत वसा होती है, इसलिए यह टोंड दूध की तुलना में थोड़ा अधिक गाढ़ा और वसा युक्त होता है।

नारंगी रंग का दूध

नारंगी रंग के पैकेट में आमतौर पर फुल क्रीम दूध मिलता है, जिसमें करीब 6 प्रतिशत वसा होती है।

किसके लिए कौन-सा दूध है सही?

डाइटिशियन श्वेता जे. पंचाल के अनुसार, अगर आप अपना वजन नियंत्रित करना चाहते हैं तो नीले रंग के पैकेट वाला दूध ले सकते हैं। वहीं, मुंहासे वाली त्वचा है तो नीले या लाल रंग के पैकेट वाला दूध डाइट में शामिल किया जा सकता है। पीसीओएस की स्थिति में हरे रंग के पैकेट वाला मानकीकृत दूध लिया जा सकता है, हालांकि संतुलित आहार और अपनी पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देना भी जरूरी है। मधुमेह से जूझ रहे लोग नीले या हरे रंग के पैकेट वाला दूध सीमित मात्रा में ले सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने कुल कार्बोहाइड्रेट सेवन और रक्त शर्करा का भी ध्यान रखना चाहिए। वहीं, बढ़ते बच्चों के लिए उनकी उम्र, ऊर्जा, प्रोटीन और वसा की जरूरत के हिसाब से नारंगी रंग के पैकेट वाला फुल क्रीम दूध उपयोगी हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखा गया है। दूध के पैकेट का रंग अलग-अलग ब्रांड में अलग भी हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के बिना अपनी डाइट में कोई बदलाव न करें