
बाढ़ पर अखिलेश का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- पीड़ितों को भोजन, पानी और दवाइयां तुरंत दें (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Akhilesh comments BJP government: उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर बाढ़ पीड़ितों की परेशानियों को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने अपनी पोस्ट की शुरुआत काव्यात्मक अंदाज में करते हुए लिखा, “भला क्या जलाये कोई दीया, जब पानी में डूब गया है दीप।” इसके बाद उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों की समस्याओं का जिक्र करते हुए सरकार से तत्काल भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि भाजपा सरकार से जनता पूरी तरह निराश हो चुकी है और लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब बाढ़ के कारण कई परिवारों के घर उजड़ गए हैं और लोग तरह-तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब उत्सव मनाने का काम कैसे किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिल रही है और कई जगहों पर लोगों की परेशानियों को सुनने वाला कोई नहीं है।
अखिलेश ने सवाल उठाया कि ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं, तब सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए। उनके मुताबिक, आपदा की स्थिति में सबसे पहले प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचना चाहिए और प्रशासन को मौके पर मौजूद रहकर लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
अपने पोस्ट में सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि सरकार को आम जनता, गरीबों, शोषितों, वंचितों और बाढ़ पीड़ितों का रत्ती भर भी ख्याल नहीं है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि जिन परिवारों के घर और घरेलू सामान पानी की चपेट में आ गए हैं, उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी है। अखिलेश यादव ने सरकार से मांग की कि राहत कार्यों को केवल कागजी दावों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रभावित इलाकों में वास्तविक जरूरत के हिसाब से मदद पहुंचाई जाए। उन्होंने भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
सपा अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में कहा कि भाजपा सरकार को तत्काल भोजन-पानी, दवाई और अन्य दैनंदिनी जरूरतों के लिए राहत सामग्री पहुंचानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार जनता की परेशानियों को लेकर गंभीर नहीं है तो उसे स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उसका आम लोगों से कोई मतलब नहीं है। अखिलेश के इस बयान को प्रदेश में जारी बाढ़ की स्थिति के बीच विपक्ष की ओर से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी वह बाढ़ और जलभराव से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर में प्रयागराज के प्रेरणा स्थल के बाढ़ के पानी से घिरने को लेकर भी उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा था।
हालांकि, बाढ़ राहत को लेकर सरकार और प्रशासन की ओर से अलग तस्वीर पेश की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर के दूसरे सप्ताह में उत्तर प्रदेश के कई जिले बाढ़ से प्रभावित थे। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को रखा गया। 12 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 21,350 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका था और लगभग 2,972 लोग राहत शिविरों में रह रहे थे।
इसी दौरान प्रशासन की ओर से लाखों लंच पैकेट और बड़ी संख्या में बाढ़ राहत किट वितरित किए जाने की जानकारी भी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा टीमों की तैनाती की थी। जल जनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
बाढ़ प्रभावित जिलों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से राहत कार्यों की समीक्षा और प्रभावित परिवारों से मुलाकात भी की गई है। सितंबर की शुरुआत में फर्रुखाबाद में मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की थी। सरकार की ओर से कहा गया था कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कुछ परिवारों को आवासीय भूमि के आवंटन से जुड़े प्रमाणपत्र और आपदा राहत के तहत आर्थिक सहायता भी दी गई थी। वाराणसी में भी मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों का दौरा कर स्थिति की जानकारी ली थी। प्रशासन की ओर से राहत और सहायता कार्यों की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई थी।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बाढ़ और राहत-बचाव जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते जा रहे हैं। विपक्ष जहां प्रभावित परिवारों की समस्याओं को उठाते हुए सरकार से और अधिक राहत की मांग कर रहा है, वहीं सरकार की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों के आंकड़े जारी कर अपनी तैयारियों और कार्रवाई को सामने रखा जा रहा है।
ऐसे में अखिलेश यादव का ताजा पोस्ट भी इसी राजनीतिक विमर्श की कड़ी माना जा सकता है। उनके बयान का केंद्र बिंदु बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें, राहत सामग्री की उपलब्धता और सरकार की प्राथमिकताएं हैं। वहीं सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन की ओर से बचाव, राहत शिविरों, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर अभियान चलाया गया है। दोनों पक्षों के दावों के बीच जमीनी स्तर पर राहत की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट के अंत में सरकार से बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल राहत पहुंचाने की मांग दोहराई और अपने बयान को “घोर निंदनीय” टिप्पणी के साथ समाप्त किया। उनके बयान से साफ है कि समाजवादी पार्टी बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानियों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
बाढ़ जैसी आपदा में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, सुरक्षित पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता, आश्रय और जरूरी घरेलू सामान सबसे अहम जरूरतें होती हैं। ऐसे में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच राहत कार्यों की पहुंच और उसकी प्रभावशीलता पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, प्रशासन की ओर से जारी राहत कार्य और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवाल प्रदेश की राजनीतिक चर्चा में प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।
अखिलेश यादव की मांग और सरकार के राहत संबंधी दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक सहायता कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंच रही है। सरकारी आंकड़ों में राहत सामग्री वितरण और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जानकारी है, जबकि विपक्ष प्रभावित क्षेत्रों में और अधिक सहायता की जरूरत बता रहा है।
बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी प्रभावित परिवारों के सामने घरों की सफाई, क्षतिग्रस्त सामान की भरपाई, बीमारी से बचाव और सामान्य जीवन में लौटने की चुनौती रहेगी। ऐसे में तत्काल राहत के साथ पुनर्वास और नुकसान की भरपाई भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण विषय होंगे। फिलहाल अखिलेश यादव के “भला क्या जलाये कोई दीया, जब पानी में डूब गया है दीप” वाले पोस्ट ने बाढ़, राहत और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
Updated on:
18 Sept 2026 11:48 am
Published on:
18 Sept 2026 11:48 am
