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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृद्धाश्रम से वृद्ध दंपति को निकाले जाने पर रोक लगाई

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक वृद्ध जोड़े को वृद्धाश्रम से बेदखल करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने फैसला सुनाया कि विवाद के संबंध में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत के समक्ष लंबित एक मुकदमे के निपटारे तक दंपति को वृद्धाश्रम से बेदखल नहीं किया जाएगा।
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लखनऊ

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Mahima Soni

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Updated: 5 Oct 2021, 3:05 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृद्धाश्रम से वृद्ध दंपति को निकाले जाने पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृद्धाश्रम से वृद्ध दंपति को निकाले जाने पर रोक लगाई

लखनऊ. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक वृद्ध जोड़े को वृद्धाश्रम से बेदखल करने पर रोक लगा दी है। यह वृद्धाश्रम आदिलनगर में गायत्री परिवार ट्रस्ट के प्रबंधन द्वारा समर्पण के नाम से लखनऊ नगर निगम द्वारा पट्टे पर दी गई जमीन पर चलाया जाता है।

अदालत ने फैसला सुनाया कि विवाद के संबंध में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत के समक्ष लंबित एक मुकदमे के निपटारे तक दंपति को वृद्धाश्रम से बेदखल नहीं किया जाएगा।

न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने 20 अक्टूबर, 2020 को एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) द्वारा जारी आदेश के खिलाफ दंपति द्वारा दायर एक रिट याचिका पर निर्देश पारित किया, जिसमें उन्होंने सिविल जज (जूनियर) की अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था। जज ने वृद्ध दंपत्ति को बेदखली से सुरक्षा प्रदान की थी।

एडीजे के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि सिविल जज की अदालत द्वारा जारी आदेश इस शर्त के साथ बहाल किया जाता है कि याचिकाकर्ता (दंपति) वृद्धाश्रम में अपने कब्जे के लिए मासिक शुल्क का भुगतान करेंगे, जिसमें प्रति माह 12,000 रुपये की अस्थायी दर पर भोजन और बिजली के लिए शुल्क शामिल हैं।

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राशि प्रत्येक माह के अंत में चेक द्वारा देय होगी जिसके लिए प्रबंधन एक रसीद जारी करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, दंपति को उनके ही बच्चों ने 2016 में छोड़ दिया था। उन्होंने आश्रय के लिए समर्पण वृद्धाश्रम का दरवाजा खटखटाया था।

आवश्यकता के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा राशि के रूप में 75,000 रुपये जमा किए थे और मासिक शुल्क का भुगतान करने के लिए सहमत हुए थे। बाद में 2019 में, दंपति ने सिविल कोर्ट का रुख किया और कहा कि वृद्धाश्रम का प्रबंधन उन्हें अवैध रूप से बेदखल करने पर अड़ा हुआ है। हालांकि, प्रबंधन ने वृद्ध दंपत्ति, विशेषकर महिला के बुरे व्यवहार को बेदखली का कारण बताया।

प्रबंधन ने आगे कहा कि दंपति की तीन बेटियां शहर में ही रहती हैं और इसलिए वे उनके साथ रह सकते हैं।

सिविल जज ने माता-पिता को सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन अपील में एडीजे ने सिविल जज के आदेश को खारिज कर दिया। अब, उच्च न्यायालय ने दीवानी न्यायाधीश के लिए कुछ अतिरिक्त निर्देशों के साथ दीवानी न्यायाधीश के आदेश को बहाल कर दिया है।
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