
सरकार से तत्काल बातचीत की मांग (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Chandrashekhar Azad Candle March: पंचायत सहायकों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने लखनऊ में कैंडल मार्च निकालकर सरकार के प्रति नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले छह दिनों से पंचायत सहायक अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उनकी समस्याओं पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने पंचायत सहायकों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पंचायत सहायकों के जीवन में सरकार ने जिस तरह का अंधेरा पैदा किया है, उसे दूर करने के उद्देश्य से यह कैंडल मार्च आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायक लंबे समय से गांवों में सरकार की योजनाओं और पंचायत स्तर की व्यवस्थाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं और मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आंदोलनरत पंचायत सहायकों के साथ उनकी पार्टी और वह स्वयं मजबूती से खड़े हैं।
पंचायत सहायकों की ओर से मानदेय में बढ़ोतरी सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मौजूदा मानदेय में उनके लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर जिम्मेदारियां निभाने वाले इन कर्मचारियों का कहना है कि काम और जिम्मेदारियों के अनुपात में उन्हें उचित पारिश्रमिक और कर्मचारी संबंधी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जब पंचायत सहायक अपनी समस्याओं को लेकर लगातार छह दिनों से सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तो सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी वर्ग की जायज मांगों को अनदेखा करना उचित नहीं है। सरकार को आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने पंचायत सहायकों की प्रमुख मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी मांगों में मानदेय या वेतन में बढ़ोतरी, राज्य कर्मचारी का दर्जा और मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये केवल सुविधाओं की मांग नहीं, बल्कि पंचायत सहायकों के सम्मान और उनके सामाजिक एवं आर्थिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि पंचायत सहायक गांवों में सरकारी योजनाओं और पंचायत से जुड़े कामों में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सेवा शर्तों और भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पंचायत सहायकों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और उन्हें ऐसी सुविधाएं दी जाएं, जिससे वे अपने दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें।
चंद्रशेखर आजाद ने सरकार से सीधे संवाद की मांग करते हुए कहा कि पंचायत विभाग के जिम्मेदार मंत्रियों और अधिकारियों को आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इन कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर चुप क्यों है और उनकी आवाज को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। सरकार यदि पंचायत सहायकों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर उनसे वार्ता करती है तो गतिरोध समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे पंचायत सहायकों की समस्याओं का समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ।
कैंडल मार्च के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने आंदोलनरत पंचायत सहायकों को समर्थन देते हुए कहा कि वह उनके संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर उनकी पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय सकारात्मक माहौल में बातचीत करे।
उन्होंने कहा कि पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस निर्णय लेना चाहिए। यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान समय रहते कर दिया जाता है तो इससे न केवल आंदोलन समाप्त होगा, बल्कि पंचायत स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
पंचायत सहायकों के आंदोलन और उनके समर्थन में विपक्षी राजनीतिक दलों की सक्रियता के बीच अब सरकार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में आर्थिक स्थिति में सुधार, सेवा से जुड़ी सुविधाएं और कर्मचारी के रूप में बेहतर दर्जा दिए जाने की मांग शामिल है। चंद्रशेखर आजाद के समर्थन के बाद इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला है।
फिलहाल पंचायत सहायकों का संघर्ष जारी है और वे अपनी मांगों को लेकर सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर गंभीरता से बातचीत नहीं होती, तब तक उनकी आवाज उठती रहेगी। वहीं चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी पंचायत सहायकों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ रहेगी। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में कब तक वार्ता की पहल करती है और पंचायत सहायकों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
Updated on:
13 Sept 2026 09:22 am
Published on:
13 Sept 2026 09:22 am
