प्रदेश में सरसों का तेल 200 के पार है, समस्त दालें 150 रुपये से लेकर 200 रुपये में बिक रही हैं, परन्तु सरकार के कान पर जू भी नहीं रेंग रही। उन्होंने कहा कि दलहन एवं तिलहन की रिकार्ड पैदावार प्रदेश के किसानों ने की पर इसका लाभ न तो किसान को मिल रहा है और न प्रदेश की जनता को। नये कृषक कानूनों के अन्तर्गत आवश्यक वस्तु अधिनियम को निरस्त कर दिया गया है जिसका लाभ उठाकर सरकार के धनपशु दोस्त दलहन एवं तिलहन को अपने गोदामों में भर कर बेतहाशा लाभ कमा रहे हैं। यह अत्यधिक शर्म की बात है कि सरकार अपने पूंजीपति मित्रों के साथ मिलकर गरीब जनता का शोषण कर रही है।