
लखनऊ. कैराना लोकसभा व नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी। इस बात की औपचारिक घोषणा कांग्रेस प्रवक्ता द्विजेंद्र त्रिपाठी ने बुधवार को की। उनके मुताबिक, पिछले लोकसभा चुनाव में कैराना में कांग्रेस ने आरएलडी को समर्थन दिया था वहीं विधानसभा चुनाव के दौरान नूरपुर की सीट सपा के खाते में गई थी। इसी कारण कांग्रेस फिलहाल दोनों जगह अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी।
महागठबंधन को समर्थन
बता दें कि कैराना में आरएलडी के टिकट पर सपा की उम्मीदवार चुनाव लड़ रही हैं तो वहीं नूरपुर में सपा ने आरएलडी उम्मीद को समर्थन दिया है। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का कहना है कि कांग्रेस का उद्देश्य भाजपा की निरंकुशता पर अंकुश लगाना है। कैराना और नूरपुर से ही वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दिशा भी तय होगी। उन्होंने गत विधानसभा चुनाव के परिणामों का हवाला देते हुए बताया कि कैराना संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों में तीन स्थानों पर कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी और ढाई लाख से अधिक वोट भी मिले थे।
स्थानीय कार्यकर्ताओं में मायूसी
राष्ट्रीय नेतृत्व के रवैये से स्थानीय कार्यकर्ताओं में मायूसी बढ़ी है। बिजनौर जिले के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए स्थानीय जिला इकाई प्रत्याशी का नाम फाइनल कर चुकी थी और राष्ट्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर जानकारी भी दे दी गयी थी। इसके बाद शीर्ष स्तर से हरी झंडी नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में मायूसी है। एक पूर्व विधायक का कहना है कि चुनाव से भागने पर स्थानीय संगठन और अधिक कमजोर होगा। इसका नुकसान आने वाले दिनों में कांग्रेस को झेलना ही होगा।
पिछले उपचुनाव में हुई थी जमानत जब्त
गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन से इतर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी खड़े किये थे. दोनों ही जगह कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। गोरखपुर में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ सुरहीता करीम 18,858 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं और उनकी जमानत जब्त हो गई। वहीं फूलपुर में पार्टी प्रत्याशी मनीष मिश्रा को निर्दलीय अतीक अहमद से भी कम वोट मिले. 19,353 वोटों के साथ वे चौथे नंबर पर रहे और अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।
Updated on:
9 May 2018, 1:29 PM IST
Published on:
9 May 2018, 1:29 PM IST
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