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बिजलीकर्मियों की हड़तालः डिप्टी सीएम, उर्जा मंत्री समेत 36 मंत्रियों के घर की बत्ती गुल

लाखों लोगों ने अंधेरे में काटी रात मंगलवार को भी प्रदेश के कई जिलों में बिजली गुल फाल्ट ठीक करने वाले कर्मचारी भी हड़ताल पर
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Electrity Strike in UP

यूपी में बिजली कर्मियाें की हड़ताल

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने का असर मंगलवार को भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दिख रहा है। कई जगहों पर बिजली कट की वजह से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हड़ताल की वजह से सोमवार की रात से यूपी के अधिकांश हिस्सों में बिजली की सप्लाई बाधित हुई जो मंगलवार की तक जारी है। इसके चलते लाखों लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा। बिजली गुल होने की वजह से राजधानी लखनऊ में उपमुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री समेत कुल 36 मंत्रियों के आवास में बिजली की सप्लाई नहीं हो पाई। सभी मंत्रियों के घर में अंधेरा छाया रहा। इसके अलावा हजारों घरों में भी पावर सप्लाई नहीं हो सकी।

बिजली अभियंता जिद पर अड़े

वीवीआईपी इलाकों में बिजली गुल होने के बाद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने बिजली बहाल करने की कोशिश की। लेकिन बिजली अभियंताओं ने विद्युत आपूर्ति बहाल करने से मना कर दिया। आनन-फानन मध्यांचल निगम के एमडी सूर्यपाल गंगवार ने निदेशक (तकनीकी) सुधीर कुमार को भेजा इसके बाद रात में करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वैकल्पिक रूप से बिजली सप्लाई बहाल हुई।

10 से 16 घंटे की कटौती

बिजली कर्मचारियों के हड़ताल की वजह से लखनऊ से लेकर नोएडा और मेरठ से लेकर वाराणसी तक तमाम जिलों में 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी सहति कई बड़े शहरों के पावर स्टेशन ठप हो गए। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ, बलिया, चंदौली समेत कई जिलों में सोमवार को सुबह 9 बजे से बिजली की सप्लाई बंद हो गई, जो रात भर जारी रही।

लोगों में गुस्सा

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल की हड़ताल की वजह से लोगों के बीच काफी गुस्सा है। बिजली की सप्लाई ठप होने की वजह से बिजली कर्मचारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही सड़कों पर बवाल भी काटा। बहराइच में निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में निकलने वाले मशाल जुलूस पर प्रशासन ने अचानक रोक लगा दी। इसके बाद कार्यालय पर ही मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी।

चेयरमैन के इनकार से फंसा समझौते पर पेंच

सोमवार को उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति के साथ हुए समझौते के बाद यूपीपीसीएल के चेयरमैन ने समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। समझौते के तहत घाटे को कम करने के लिए कर्मचारियों को सुधार के लिए मौका दिया गया था। मंत्री ने सुधार के लिए बिजलीकर्मियों को 31 मार्च तक का समय दिया था। जिसके बाद मार्च तक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को टालने पर सहमति बनी। इसके बाद बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति ने आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया था. लेकिन यूपीपीसीएल चेयरमैन इसके लिए तैयार नहीं हुए, जिससे अब आंदोलन लंबा खिंच सकता है।

अरबों के घटे में निगम

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड अरबों के घाटे में है। जिसके बाद सरकार ने कर्मचारियों को चेताया था। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ। बिजली चोरी, कटिया कनेक्शन और बिजली बिल की वसूली करने में लापरवाही देखने को मिली जिसके बाद सरकार ने इसे निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया। जिसके विरोध में 5 अक्टूबर से बिजलीकर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।