
सतना. मातृभूमि के लिए बलिदान हमारी परंपरा है। जब कारगिल युद्ध हुआ तो अनेक सैनिकों ने शहादत पाई। उनका बलिदान देश पर मर-मिटने का संकल्प जगा गया। जानिए ऐसे ही एक परिवार की गाथा ...
महज एक पखवाड़े के भीतर चाचा और पिता की शहादत से सतना जिले के चूंद गांव के नौजवान विनय सिंह का और उसके परिवार का हौसला नहीं टूटा। पिता को मुखाग्नि देते हुए विनय ने सेना में जाने का संकल्प ले लिया।
कड़ी मेहनत कर शारीरिक क्षमता को बढ़ाया और सेना में भर्ती हो गए। अब विनय सीमा पर पिता के अधूरे रह गए फर्ज को पूरा कर रहे हैं। पहले उनके पिता कन्हैयालाल सिंह कारगिल युद्ध के आपरेशन रक्षक में शहीद हुए, उसके कुछ दिन बाद ही चाचा बाबूलाल सिंह को भी शहादत मिली।
गांव में दोनों की शहादत की याद में स्मारक बनाया गया है। जो चूंद गांव ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों को भी गर्व से भर देता है।
Published on:
26 Jul 2016, 8:15 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.