
20 दिन में निर्माण सामग्री के दामों में बड़ा उछाल, सरिया 54 से बढ़कर 62 रुपये किलो पहुंचा (फोटो सोर्स : Cement Trade Union/ Whatsapp Group)
House Construction Costs: अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में पिछले करीब 20 दिनों के भीतर अचानक तेजी आने से निर्माण का बजट बिगड़ने लगा है। सरिया, बालू और मौरंग के दाम बढ़ने का सीधा असर मकान की लागत पर पड़ रहा है। बाजार में जिस सरिया की कीमत 16 अगस्त को करीब 54 रुपये प्रति किलो थी, वह छह सितंबर तक बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। यानी महज 20 दिनों में सरिया आठ रुपये प्रति किलो तक महंगा हो गया। इसी तरह बालू के दाम 28 रुपये से बढ़कर 30 रुपये और मौरंग 67 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति घन फुट हो गई है। निर्माण सामग्री के लगातार बढ़ते दामों ने आम आदमी के लिए घर बनाना पहले की तुलना में और महंगा कर दिया है।
मकान निर्माण में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों में सरिया प्रमुख है। नींव से लेकर छत की ढलाई तक इसके इस्तेमाल के कारण कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी पूरे निर्माण बजट पर बड़ा असर डालती है। बाजार में सरिया के भाव में आठ रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी से निर्माणाधीन मकानों के मालिकों के सामने अतिरिक्त खर्च का संकट खड़ा हो गया है। कारोबारियों के मुताबिक स्टील की कीमतों में आई तेजी का असर निर्माण क्षेत्र पर तत्काल दिखाई देने लगा है। खासकर जिन लोगों ने पहले से निर्माण सामग्री की खरीद का बजट तय कर रखा था, उन्हें अब अतिरिक्त रकम का इंतजाम करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याम मूर्ति गुप्ता के मुताबिक पिछले कुछ समय में सरिया के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। स्टील की कीमतों में अचानक आए इस उछाल का असर सीधे लेंटर और छत की ढलाई के खर्च पर पड़ रहा है। जिन लोगों का निर्माण कार्य इसी चरण में पहुंचा है, उनके लिए बढ़ी कीमतें बड़ी आर्थिक चुनौती बन गई हैं।
सरिया के साथ ही निर्माण में जरूरी बालू और मौरंग के दाम भी बढ़े हैं। करीब 20 दिन पहले बालू 28 रुपये प्रति घन फुट की दर से बिक रही थी, जिसकी कीमत अब बढ़कर 30 रुपये प्रति घन फुट हो गई है। इसी अवधि में मौरंग का भाव 67 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति घन फुट हो गया। देखने में यह बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन एक मकान के निर्माण में बड़ी मात्रा में बालू और मौरंग की जरूरत होने के कारण कुल लागत पर इसका असर काफी अधिक पड़ता है।
लखनऊ कारोबारियों का कहना है कि बालू और मौरंग की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे ढुलाई खर्च और आपूर्ति में बदलाव प्रमुख कारण हैं। हीवेट रोड के मौरंग कारोबारी अनिल अग्रवाल के अनुसार, पीछे से आपूर्ति में बदलाव और परिवहन लागत बढ़ने के कारण बाजार में कीमतें ऊपर आई हैं। आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने और परिवहन खर्च में कमी आने पर कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि फिलहाल बाजार में बढ़े हुए भाव पर ही बिक्री हो रही है।
निर्माण सामग्री में सीमेंट की कीमत फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर है, लेकिन अलग-अलग ब्रांड और गुणवत्ता के आधार पर इसके दाम में अंतर बना हुआ है। बाजार में 50 किलो की सीमेंट बोरी करीब 340 से 400 रुपये तक बिक रही है। उपभोक्ताओं को ब्रांड, गुणवत्ता और दुकानदार के हिसाब से अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ रही है। मकान बनाने वालों के लिए सीमेंट की कीमत में बड़ा बदलाव भले ही फिलहाल नहीं आया हो, लेकिन सरिया, बालू और मौरंग के बढ़े दाम के साथ इसका खर्च भी कुल निर्माण लागत को बढ़ा रहा है।
निर्माण कारोबारियों का कहना है कि मकान बनाने वाले लोग आमतौर पर सामग्री की खरीद चरणबद्ध तरीके से करते हैं। ऐसे में यदि निर्माण के अलग-अलग चरणों के दौरान कीमतें लगातार बढ़ती रहे तो शुरुआती अनुमान और वास्तविक खर्च में काफी अंतर आ जाता है। यही वजह है कि कई लोग निर्माण कार्य को कुछ समय के लिए टालने या चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
निर्माण सामग्री के बाजार में जहां सरिया, बालू और मौरंग के दाम बढ़े हैं, वहीं ईंट और गिट्टी की कीमत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। लखनऊ ब्रिक क्लिन एसोसिएशन के संरक्षक मुकेश मोदी के मुताबिक ईंट अभी करीब नौ हजार रुपये प्रति हजार की पुरानी दर पर उपलब्ध है। इससे मकान बनाने वालों को कुछ राहत जरूर है, लेकिन निर्माण की अन्य प्रमुख सामग्रियों के महंगे होने से कुल बजट पर दबाव कम नहीं हुआ है।
इसी तरह गिट्टी का भाव करीब 58 रुपये प्रति घन फुट के स्तर पर बना हुआ है। कारोबारियों के मुताबिक गिट्टी और ईंट की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। हालांकि यदि सरिया, बालू और मौरंग के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो आने वाले दिनों में निर्माण सामग्री के पूरे बाजार पर इसका असर पड़ सकता है।
लखनऊ साइकिल मर्चेंट ट्रेड व्यापार मंडल के अध्यक्ष जगजीत सिंह के मुताबिक करीब एक माह के दौरान स्टील की कीमत में उल्लेखनीय तेजी आई है। बाजार में स्टील की कीमत बढ़ने से इसका प्रभाव छोटे-बड़े सभी निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवार, जो सीमित बजट में अपना मकान बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह बढ़ोतरी चिंता का कारण बन गई है।
मकान निर्माण में सरिया की बड़ी मात्रा में जरूरत होती है। ऐसे में प्रति किलो कीमत में आठ रुपये की बढ़ोतरी होने पर कुल खरीद में हजारों रुपये का अंतर आ सकता है। बड़े निर्माण प्रोजेक्ट में यह अंतर और अधिक बढ़ जाता है। यही वजह है कि ठेकेदार और मकान मालिक दोनों बाजार के भाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्होंने अपनी जीवन भर की बचत या बैंक ऋण के सहारे घर बनाने की योजना तैयार की है। पहले से तय बजट में निर्माण शुरू करने वाले लोगों को अब अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ रही है। वहीं, जिन लोगों ने निर्माण शुरू करने की तैयारी की है, वे बाजार की स्थिति को देखते हुए खर्च का दोबारा आकलन कर रहे हैं।
बढ़ती कीमतों का असर केवल सामग्री तक सीमित नहीं रहता। निर्माण लागत बढ़ने के साथ मजदूरी, ढुलाई और अन्य संबंधित खर्च भी कुल बजट को प्रभावित करते हैं। यदि निर्माण सामग्री के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं तो मकान की कुल लागत में और वृद्धि होने की संभावना है।
कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे आपूर्ति, परिवहन और बाजार में स्टील की कीमतों में बदलाव जैसे कई कारण हैं। यदि आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होती है और ढुलाई खर्च में कमी आती है तो बालू और मौरंग के दामों में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि सरिया के मामले में बाजार की स्थिति पर निर्भरता अधिक है।
फिलहाल घर बनाने वालों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ता निर्माण बजट है। सरिया, बालू और मौरंग के बढ़े भाव ने निर्माण की लागत को प्रभावित कर दिया है। ईंट और गिट्टी के दाम स्थिर होने के बावजूद प्रमुख निर्माण सामग्री की कीमतों में आई तेजी ने आम आदमी के लिए अपने घर का सपना पहले से अधिक महंगा कर दिया है। ऐसे में निर्माण शुरू करने या आगे बढ़ाने वाले परिवारों को मौजूदा बाजार भाव के अनुसार अपने बजट की नए सिरे से योजना बनानी पड़ रही है।
Updated on:
10 Sept 2026 11:21 am
Published on:
10 Sept 2026 11:21 am
