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आकाश आनंद के ‘पर’ फिर कतरे मायावती ने, क्यों बार-बार बदलता रहा भतीजे पर बसपा सुप्रीमो का रुख?

Mayawati Aakash Anand: आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारियों से दूर कर मायावती ने फिर अपना रुख साफ किया है। जानिए कभी उत्तराधिकारी बनाए गए आकाश का कद बार-बार क्यों घटा-बढ़ा और इसके पीछे BSP सुप्रीमो की रणनीति क्या है।
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लखनऊ

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Aman Pandey

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Updated: 4 Sep 2026, 10:28 AM IST

up politics amid bsp election preparations suspense looms over akash anand role mayawati

मायावती की नई चाल या बदली हुई रणनीति? फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Mayawati Latest Decision: उत्तर प्रदेश की सियासत में परिवारवाद और भाई-भतीजावाद का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए हमेशा संवेदनशील रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश आनंद को एक बार फिर बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर कर इसी मुद्दे पर अपनी राजनीतिक लाइन साफ करने की कोशिश की है। 3 सितंबर को लखनऊ में हुई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। फिलहाल उन्हें पार्टी में एक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने की अनुमति दी गई है।

मायावती का यह फैसला सिर्फ आकाश आनंद की जिम्मेदारी कम करने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए उन्होंने पार्टी के भीतर अपने वर्चस्व को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सामने मायावती ने कांशीराम के सिद्धांतों और बहुजन आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी किसी तरह के भाई-भतीजावाद और परिवारवाद में विश्वास नहीं करती।

भतीजे का कद घटाया, संगठन को दिया संदेश

आकाश आनंद को पहले मायावती अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बना चुकी हैं। इसके बाद कई बार उन्हें इन जिम्मेदारियों से हटाया गया और फिर वापस भी लाया गया। ऐसे में गुरुवार का फैसला आकाश के राजनीतिक सफर में एक और बड़ा मोड़ है। मायावती ने बैठक में आकाश की राजनीतिक अपरिपक्वता का जिक्र करते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया। इसके साथ ही पार्टी के दूसरे पदाधिकारियों को भी यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बसपा में अंतिम निर्णय का केंद्र मायावती ही हैं।

दिलचस्प बात यह है कि आकाश आनंद के एक्स प्रोफाइल में भी बदलाव दिखाई दिया। पहले जहां वह खुद को राष्ट्रीय संयोजक बताते थे, अब उनकी पहचान बसपा कार्यकर्ता के तौर पर सामने आ रही है।

इससे पहले भी मायावती अनुशासनहीनता के आरोपों में आकाश आनंद को दो बार पार्टी से निष्कासित कर चुकी थीं। इसके अलावा उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। पारिवारिक मान-मनौव्वल और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मायावती ने आकाश की बसपा में वापसी कराई थी और उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी थी। हाल ही में आकाश आनंद ने राज्य में दो बड़ी राजनीतिक रैलियों को संबोधित किया था, जिनमें उनके आक्रामक तेवरों की काफी चर्चा हुई थी। हालांकि, इन कार्यक्रमों के तुरंत बाद पार्टी के आंतरिक ढांचे में खींचतान और गुटबाजी फिर से सतह पर आ गई।

कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला क्यों?

मायावती ने आकाश पर फैसला सुनाते समय बसपा संस्थापक कांशीराम के संकल्प और समर्पण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार के लोगों को पार्टी में काम करने की अनुमति तो दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या संगठन में पद देने के पक्ष में नहीं थे।मायावती ने स्पष्ट किया कि वे भी उसी परंपरा और संकल्प का पालन कर रही हैं।

उन्होंने यह आशंका भी जताई कि विरोधी दल तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर पार्टी को चुनावी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं, इसी वजह से एहतियातन आकाश को अभी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखा गया है। मायावती ने खुद को भी इसी विचारधारा पर चलने वाला बताया। इसके जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि आकाश आनंद को परिवार का सदस्य होने के कारण संगठन में कोई विशेषाधिकार नहीं दिया जा रहा है।

दो बार निष्कासन, दो बार वापसी… फिर क्यों बदला रुख?

आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख लगातार बदलता रहा है। 7 मई 2024 को मायावती ने उन्हें बसपा के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी पद से हटा दिया था। उस समय भी वजह राजनीतिक परिपक्वता की कमी बताई गई थी। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद 23 जून 2024 को आकाश को फिर राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और उत्तराधिकारी बना दिया गया।

इसके बाद 2 मार्च 2025 को मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर समेत सभी पदों से हटा दिया और अगले ही दिन पार्टी से निष्कासित कर दिया। अप्रैल 2025 में आकाश की फिर बसपा में वापसी हुई। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु और आदर्श बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

इसके बाद 18 मई 2025 को मायावती ने उन्हें चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर जैसी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंप दी। अब सितंबर 2026 में एक बार फिर आकाश को बड़ी जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया है।

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