
लखनऊ. 8 नवंबर 2016 की रात, पीएम का देश के नाम संदेश जिसके बाद नोटबंदी लागू हो गई। अगले दिन से बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगना शुरू। वो तस्वीरें आज भी लोगों के जहन में हैं। अपने ही खाते से पैसे निकालने के लिए घंटो लाइनों में खड़ा होना। सरकार की कोशिश थी की काला धन खत्म हो जाएगा। लोग अपनी कमाई के हिसाब से सरकार को टैक्स जमा करें ताकि देश की जरूरत के मुताबिक विकास किया जा सके। ई-पेमेंट और प्लास्टिक मनी का ज्यादा से इस्तेमाल हो लेकिन नोटबंदी के एक साल बाद भी प्रदेश में डिजिटल पेमेंट उतनी तेजी से नहीं बढ़ा जितनी उम्मीद की जा रही थी।
कैशलेस की राह में कई अड़चनें
कैशलेस की राह में कई अड़चनें है जो नोटबंदी के साल भर पूरे होने पर भी बरकरार हैं। ठीक एक साल पहले वाणिज्य मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी, जिला प्रशासन और बैंकर्स के साथ हुई मीटिंग में रिजर्व बैंक के अफसरों ने बैंकों में जिम्मेदारी डाली थी कि जिस भी दुकानदार, व्यापारी या सेवा प्रदाता का खाता उनके बैंक में है, वे उससे संपर्क कर पीओएस मशीन लगवाने का दबाव डालेंगे। उन्हें आने वाले समय के लिए तैयार करेंगे। यह व्यवस्था एक साल बाद भी कारगर नहीं हो पाई। कई जगह एटीएम भी बंद पड़े हैं, पीओएस मशीन से ट्रांजेक्शन ज्यादा नहीं बढ़ा है। इसका कारण इसमें लगने वाला यूजर चार्ज है जो 0.75% से 1.75% तक कटता है।
30 फीसदी से ज्यादा एटीएम बूथ बंद होंगे
अब गली-मोहल्लों में कदम-कदम पर खुले एटीएम बूथ में ताला लगाने की तैयारी है। सरकारी बैंकों ने ऐसे सभी एटीएम को हटाने का फैसला किया है, जहां रोजाना सौ से कम ग्राहक पहुंचते हैं। यह फैसला डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देने के साथ-साथ एटीएम के संचालन और रखरखाव पर खर्च को घटाने की कवायद है। इस फैसले पर अमल होने के बाद बड़े शहरों में 30 फीसदी से ज्यादा एटीएम बूथ बंद होना तय हैं। राहत के लिए बैंकों ने शाखा परिसर में अनिवार्य रूप से एटीएम बूथ खोलना तय किया है।
बैंक प्रबंधन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अव्वल सभी बैंक शाखाओं के परिसर में एटीएम बूथ स्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद ही शहरों में ऐसे एटीएम बूथ खोजे जाएंगे, जहां रोजाना सौ से कम उपभोक्ता पहुंचते हैं। पहले चरण में इन्हीं एटीएम बूथ को बंद किया जाएगा, इसके बाद रोजाना औसतन तीन सौ उपभोक्ताओं की संख्या वाले एटीएम को बंद किया जाएगा। कानपुर को उदाहरण के तौर पर समझें तो शहर में कुल मिलाकर सरकारी बैंकों की 770 शाखाएं हैं और 1380 एटीएम बूथ हैं। नई व्यवस्था के मुताबिक शहर में करीब 400 एटीएम बूथ को पहले चरण में बंद कर दिया जाएगा।
कार्ड से पेमेंट पर देना पड़ता है एक से दो फीसदी
व्यापारी प्रभु जलान ने बताया कि कॉर्ड से पेमेंट होने के बाद खरीदी गई कुल राशि का एक से दो फीसदी राशि बैंक वाले खुद काट लेते हैं। व्यापारियों की दलील है कि अगर कैशलेस को बढ़ावा देना है तो यह सिस्टम खत्म होना चाहिए। वहीं, कई दुकानदार यह पैसा कस्टमर से लेते हैं जो कि नियमों के खिलाफ है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रदेश संयोजक वाई अरोड़ा बताते हैं कि हर माह एक एटीएम का खर्च करीब एक लाख रुपये तक आता है। ऐसे में जब डिमांड के हिसाब से कैश नहीं मिल रहा है तो बैंकों ने उनको बंद करने का फैसला ले लिया। हालांकि, इस दौरान भी किराया बैंकों का ही जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसको लेकर कई बार बैंक यूनियंस शिकायत भी कर चुकी है।
राजधानी में बंद पड़े एटीएम
खदरा: यहां केनरा बैंक का एटीएम था। स्थानीय निवासी रजी खान बताती हैं कि नोटबंदी के दौरान बंद हुए इस एटीएम को एक साल होने को हैं। यहां आज तक इसमें रुपये डाले ही नहीं गए हैं।
डालीगंज क्रासिंग: यहां स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम में झाड़ू-पोछा व दुकान का समान रखा जा रहा है। पास के दुकानदार ने बताया कि न तो यहां कोई गार्ड रहता है और न ही मशीन में कैश।
पुरनिया: यहां का यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का एटीएम धूल फांक रहा है। स्थानीय निवासी शाइस्ता सोनी ने बताया कि नोटबंदी के बाद से यह एटीएम बंद पड़ा है।
मड़ियांव: यहां पंजाब नैशनल बैंक के एटीएम में तो कुत्ते आराम करते हुए नजर आते हैं। स्थानीय निवासी साहब लाल का कहना है कि एटीएम की देखरेख के लिए न तो कोई गार्ड है और न ही इसमें कैश रहता है।
बादशाह नगर: जवाहर भवन बिल्डिंग के पीछे एसबीआई बैंक का एटीएम नोटबंदी के बाद से दोबारा नहीं खुल सका। बादशाह नगर स्टेशन के बाहर एसबीआई और यूको बैंक के दो एटीएम हैं, इसमें यूकों बैंक का एटीएम कभी काम ही नहीं करता। एसबीआई एटीएम बूथ पर तैनात गार्ड ने बताया कि यहां मई कैश नहीं डाला गया है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
भूतनाथ : भूतनाथ में लगा इंडियन ओवरसीज बैंक का एटीएम पिछले सात माह से खराब पड़ा है। दीपावली के दस दिन पहले यहां से मशीन हटा ली गई और शटर गिरा दिया गया। भूतनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि नोटबंदी के बाद से चारों एटीएम में कभी पूरा पैसा नहीं रहता, इससे यहां आने वाले खरीदारों को काफी परेशानी होती है।
पाई-पाई को तरस रहा खजांची का परिवार
कानपुर देहात की रहने वाली सर्वेशा देवी ने बैंक की लंबी लाइन में एक बच्चे को जन्म दिया जिसका नाम लोगों ने खजांची रख दिया। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने भी कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसका नाम लिया। ये बच्चा उस वक्त देश भर में प्रसिद्ध हो गया लेकिन एक साल में इस परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा गिर गई। उसके परिवार को एसपी सरकार ने 2 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के दिए थे। यह रुपये बच्चे की पढ़ाई में खर्च होना था लेकिन परिवार ने 75,000 रुपये दूसरे कामों में खर्च कर दिए। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में सर्वेशा ने बताया कि खजांची की चार बड़े भाई बहन हैं, उनकी शादी के लिए परिवार को रुपये चाहिए। खजांची की सबसे बड़ी बहन प्रीति दस साल की है और तीन भाईयों में से एक भाई टीबी की बीमारी से जूझ रहा है। उसका इलाज आगरा में चल रहा है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर नोटंबदी के एक साल पूरे होने पर बीजेपी और कांग्रेस समर्थक आपस में भिड़ते दिखे। कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को नोटबंदी के बहाने जमकर घेरा। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर इसे केंद्र सरकार द्वारा 'एंटी ब्लैक मनी डे' के रूप में सेलीब्रेट किए जाने को दुखद करार दिया है। अखिलेश ने ट्वीट कहा कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था बदहाल हो गई है। बेरोजगारी बढ़ी है और कारोबार-उद्योग बर्बाद हो गए हैं। ऐसे में नोटबंदी का जश्न मनाना दुखद है।
Published on:
8 Nov 2017, 1:49 PM IST
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