
नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा, हर मनोकामना होगी पूरी, जानिये पूजन विधि
लखनऊ. 17 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू हो चुकी है। नवरात्रि के चौथे दिन दुर्गा मां के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। अपनी मंद, हल्की हंसी द्वारा अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार परिव्याप्त था, तब इन्हीं देवी ने अपने 'ईषत' हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। मां कूष्मांडा की पूजा को बुराई पर अच्छाई की जीत का आधार भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मां की पूजा करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां अपने भक्तों को स्वास्थ्य, समृद्धि और यश प्रदान करती हैं।
यश, आयु और आरोग्य की वृद्धि
आज के दिन देवी कूष्मांडा की पूजा की जाताी है। कूष्मांडा शब्द दो शब्दों यानि कुसुम मतलब फूलों के समान हंसी और आण्ड का अर्थ है ब्रह्मांड। अर्थात वो देवी जिन्होनें अपनी फूलों सी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड को अपने गर्भ में उत्पन्न किया है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। साथ ही हाथ में अमृत कलश भी है। मां की पूजा करने से यश, आयु और आरोग्य की वृद्धि होती है। मां ती सवारी सिंह है जो कि धर्म का प्रतीक है। मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अतिप्रिय है। इसलिए मां कूष्मांडा को आज के दिन मालपुए का भोग चढ़ाना चाहिए।
पूजन विधि
सुबह स्नान करने के बाद हरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा के दौरान देवी को हरी इलायची, सौंफ और कुम्हणे का भोग लगाएं। फिर "ओम कूष्मांडा दैव्यै: नम:" मंत्र का 108 बार जाप करें। मां कूष्मांडा की आरती उतारें और प्रसाद चढ़ाएं।
मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए मंत्र
सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।
Published on:
20 Oct 2020 09:10 am
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