
लखनऊ. डेंगू मच्छरों के कारण फैलने वाली बीमारी पर पूरी तरह से रोक लगा पाना अभी भी स्वास्थ्य महकमे के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इससे हर साल बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामलों में कमी होने का दावा स्वास्थ्य विभाग कर रहा है लेकिन डेंगू की संभावना को पूरी तरह खत्म कर पाना अभी सम्भव नहीं हो सका है।
डेंगू के मामलों में आई है कमी
लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नरेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि लखनऊ में 2016 में 1020, 2017 में 291 और 2018 में अब तक 26 डेंगू से ग्रसित मरीज पाए गए हैं। सीएमओ के मुताबिक डेंगू के मरीजों की खोज के लिए लखनऊ के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर 25 एंटी लार्वा और 25 फागिंग टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा लखनऊ में 5 सर्वेक्षण टीमों का गठन किया गया है। सर्वेक्षण टीमें घर-घर जा कर डेंगू के मरीजों को चिन्हित कर खून की जांच के लिए नमूने एकत्रित करेंगी। साथ ही डेंगू से पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क जांच और उपचार मुहैया कराएंगी। यह व्यवस्था सभी सरकारी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध है। इसके साथ ही जुलाई माह में डेंगू माह मनाया जाएगा जिसमें प्रसार-प्रचार के लिए 40 टीमों का गठन किया जाएगा।
डेंगू के खिलाफ जारी है अभियान
लखनऊ के जिला मलेरिया अधिकारी डीएन शुक्ला ने बताया कि 25 अप्रैल 2018 से एंटी लार्वा अभियान के तहत गजट नोटिफिकेशन के तत्वाधान में जिन घरों, सरकारी दफतरों, दुकानों, प्राईवेट कार्यालयों व अन्य जगह पर मच्छर जनित स्थितियों को उत्पन्न करने के लिए भारतीय दण्ड संहिता के तहत 200 रूपये का जुर्माना व 2 माह की जेल भी हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल 5 टीमों की मदद से 150 घरों में लगभग 2500 लोगों का चालान कर नोटिस दी गई थी।
Published on:
17 May 2018, 1:59 PM IST
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