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यहां तितलियों ने संभाली माहवारी स्वच्छता की कमान, महिलाओं और किशोरियों को इस तरह कर रहीं हैं जागरूक

तितलियाँ माह में एक बार गाँव में महिलाओं व किशोरियों के साथ बैठकर माहवारी संबंधी समस्याओं पर चर्चा करती हैं।
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लखनऊ

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Laxmi Narayan Sharma

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Updated: 15 Jun 2018, 12:32 PM IST

Lucknow News

यहां तितलियों ने संभाली माहवारी स्वच्छता की कमान, महिलाओं और किशोरियों को इस तरह कर रहीं हैं जागरूक

लखनऊ. गांव की महिलाओं और किशोरियों में माहवारी स्वच्छता को लेकर एक गैर सरकारी संस्था ने अनूठी पहल की है। राजधानी लखनऊ के 6 विकास खण्डों के 56 गांव में यह पहल 106 महिलाओं की मदद से लागू की गई है। इन महिलाओं को तितली नाम दिया गया है। इन्हें माहवारी स्वच्छता सलाहकार भी कहा जाता है। ये तितलियां गाँव की महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दिनों में साफ-सफाई के बारे में जानकारी देने के साथ ही महिलाओं और युवतियों को कम दामों में सैनेटरी नैपकिन्स पैड मुहैया कराने में मदद करती हैं। इनमें से कुछ तितलियां गांव के बाहर से नैपकिन लाकर देती हैं तो कुछ ने गांव में ही डिपो बना लिया है।

घर-घर जाकर देती हैं जानकारी

इस खास अभियान से जुड़कर तितली के रूप में काम कर रही मोहनलालगंज विकासखंड के लालपुर गांव की कृष्णा को मुख्यमंत्री और पंचायती राज निदेशक सम्मानित कर चुके हैं। कृष्णा गाँव में सैनेटरी नैपकिन्स पैड का डिपो चलाती हैं और माहवारी स्वच्छता के बारे में घर-घर जाकर लोगों को जानकारी देती हैं। कृष्णा तितली के रूप में 2016 से काम कर रही हैं। इस गाँव को आबादी लगभग 1200 से अधिक और। कृष्णा बताती हैं कि वे सैनिटरी नैपकिन्स सरोजिनी नगर विकासखंड से होलसेल रेट में लाती हैं और यहाँ गाँव में लाकर बेच देती हैं।

कम कीमत में कराती हैं उपलब्ध

दरअसल जो किशोरियाँ व महिलाएं गाँव से बाहर नहीं जाती हैं, वे कृष्णा से ही सैनिटरी नैपकिन्स खरीदती हैं। यहाँ 25-30 रूपये मूल्य पर 8 नैपकिन्स मिल जाते हैं। ये तितलियाँ माहवारी स्वच्छता पर खुलकर महिलाओं व किशोरियों के साथ-साथ पुरुषों से भी बात करती हैं। गाँव में महिलाओ, किशोरियों के अलावा पुरुष भी माहवारी क्या है, सैनिटरी नैपकिंस क्या हैं व उनका किस तरह से निस्तारण करना चाहिए, इसके बारे में जानें और खुलकर चर्चा करें, यह इस पूरे पहल का मकसद है। कई जगहों पर इसके सकारात्मक नतीजे भी देखने को मिल रहे हैं।

माहवारी की अनदेखी हो सकती है जानलेवा

माहवारी स्वच्छता के संबंध में साल 2012 में 'वात्सल्य' संस्था ने विकासखंड चिनहट व बख्शी का तालाब के गाँव में फोकस ग्रुप डिस्कशन कराया था और इसमें उन लोगों को शामिल किया गया जो कि गाँव में जागरूकता लाना चाहते हैं और ऐसे लोग जिनके पास गाँव में अपनी दुकान हैं। इसी के बाद तितली अभियान की रूपरेखा तैयार हुई। समूह वात्सल्य संस्था की डॉ नीलम सिंह ने बताया कि माहवारी के 4 दिनों में अगर सुरक्षित माहवारी न मिले तो पेशाब की नली में संक्रामण, बच्चेदानी में संक्रमण हो जाता है व आगे चलकर बच्चेदानी के मुंह में सिस्ट व अल्सर हो सकता है। बांझपन, सेप्टिक अबॉरशन हो सकता है अगर बहुत दिनों तक संक्रमण हो तो मृत्यु भी हो सकती है।

इस तरह करें कपड़ों और नैपकिंस का निस्तारण

तितलियाँ माह में एक बार गाँव में महिलाओं व किशोरियों के साथ बैठकर माहवारी संबंधी समस्याओं पर चर्चा करती हैं। ये तितलियां केवल सैनिटरी नैप्किंस के उपयोग पर ही जोर नहीं देती हैं बल्कि यह भी बताती हैं कि यदि महिलाएं व किशोरियाँ कपड़े का भी उपयोग कर रही हैं तो उन कपड़ों को अच्छी तरह से धोकर व धूप में सुखाना चाहिए ताकि उनका दोबारा उपयोग किया जा सके। इन तितलियों को नैप्किंस व कपड़ों का निस्तारण कैसे किया जाये, इसके लिए लोकल इन्सिनरेटर को बनाना बताया गया ताकि वे इसे स्थानीय लोगों को बताएं और लोगों के द्वारा सेफ व स्थायी निस्तारण किया जाये। यह इन्सिनरेटर मिट्टी के घड़े होते हैं जो की घर पर ही मिट्टी व फूस को मिलाकर बनाए जाते हैं। उपयोग किए गए कपड़े व नैप्किंस को इन घड़ों में रखकर, उपयोग करने के कुछ दिनों के बाद सूखने पर नीम की पत्ती व मिट्टी का तेल डालकर जला दिया जाता है। इससे इन्फ़ैकशन नहीं फैलता है।