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UP Assembly 2025 : यूपी विधानसभा में पानी पर सियासी बवाल: मंत्री ने विधायक को दी ‘बीवी की कसम’ वाली चुनौती

UP Assembly Monsoon Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में मंगलवार को जल जीवन मिशन पर तीखी बहस छिड़ी। सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच आरोप-प्रत्यारोप इतना बढ़ा कि मंत्री ने विधायक को ‘अपनी बीवी की कसम’ खाने की चुनौती दे डाली, जिससे सदन का माहौल गरमा गया।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Aug 12, 2025

यूपी विधानसभा में ‘बीवी की कसम’ वाला विवाद: जलशक्ति मंत्री और सपा विधायक में तीखी बहस फोटो सोर्स : social media

यूपी विधानसभा में ‘बीवी की कसम’ वाला विवाद: जलशक्ति मंत्री और सपा विधायक में तीखी बहस फोटो सोर्स : social media

UP Assembly Sparks Over Water Supply Row: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान मंगलवार को प्रश्नकाल में एक अनोखा और तीखा वाक्य-विवाद देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह आमने-सामने आ गए। बहस का केंद्रबिंदु था कि जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव में पेयजल आपूर्ति की स्थिति।

प्रश्नकाल में गरमा गया माहौल

प्रश्नकाल के दौरान सपा विधायक फहीम इरफान ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए जा रहे काम अधूरे हैं, कई गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है और कई स्थानों पर टंकियां गिर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़े और जवाब वास्तविकता से मेल नहीं खाते। इरफान ने कहा कि “गांवों में आधे-अधूरे काम हुए हैं। कई जगहों पर पानी की टंकियां गिर गई हैं, कई गांवों में पानी आता ही नहीं। मंत्री जी के आंकड़े झूठे हैं।”

मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का जवाब और चुनौती

सपा विधायक के इन आरोपों पर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। वह अपनी सीट से उठे और बोले  “अगर ऐसा है तो अपनी बीवी की कसम खाकर कहिए कि गांव में पानी नहीं आ रहा है।” इस पर फहीम इरफान ने तुरंत जवाब दिया  “बिल्कुल नहीं आ रहा। आप पश्चिमी यूपी का कोई भी जिला चुन लें, वहां के गांव में पानी नहीं आ रहा होगा। अगर मैं गलत साबित हुआ तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि विधायक और सरपंच को कॉल कर के इसकी पुष्टि की जा सकती है।

जल जीवन मिशन पर सवाल

फहीम इरफान ने विधानसभा में कहा कि जल जीवन मिशन के आने के बाद हैंडपंप की व्यवस्था खत्म कर दी गई, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन ठेकेदारों को काम मिला, उन्होंने पूर्व में हुए विकास कार्यों को तोड़ दिया। पहले सड़कें तोड़ी गईं, फिर पाइप बिछाए गए। उन्होंने आगे कहा कि पानी की टंकियां निर्माण के बाद जगह-जगह गिर रही हैं और इस हादसे में कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी को मुआवजा नहीं मिला।

पानी के प्रेशर पर शिकायत

सपा विधायक ने कहा कि कई जगहों पर पानी का प्रेशर इतना कम है कि आधे घंटे में केवल एक बाल्टी पानी ही भर पाता है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध नहीं हैं।

सदन में माहौल

बहस के दौरान सदन में मौजूद अन्य विधायक भी इस विषय में अपनी राय रखने लगे। कुछ विपक्षी सदस्यों ने फहीम इरफान के दावों का समर्थन किया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्य मंत्री के पक्ष में खड़े रहे। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।

मंत्री का आश्वासन

विवाद के बीच मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे सभी कार्य पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हैं। उन्होंने दावा किया कि गांव-गांव में पानी पहुंचाने के लिए सरकार गंभीर है और जहां समस्याएं सामने आ रही हैं, वहां तुरंत समाधान कराया जा रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 जल जीवन मिशन क्या है

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल से जल उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में लाखों घरों तक पाइपलाइन बिछाकर स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताएं हैं, कई जगहों पर अधूरे प्रोजेक्ट छोड़ दिए गए हैं और घटिया गुणवत्ता के निर्माण कार्य किए गए हैं।

राजनीतिक असर

इस बहस ने न केवल विधानसभा के भीतर बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष इसे ग्रामीण जनता के मुद्दों को उठाने का उदाहरण बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष का दावा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए गलत जानकारी फैला रहा है। इस विवाद के बाद संभव है कि विधानसभा में जल जीवन मिशन की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हो। साथ ही, यह भी उम्मीद है कि सरकार योजना की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाएगी।