
बिजली कनेक्शन के नाम पर कथित रिश्वत मांगने की शिकायत पर अधिकारियों को जांच के निर्देश देते ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Electricity Department: बिजली कनेक्शन के नाम पर कथित रिश्वत मांगने और उपभोक्ता पर लाखों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की शिकायत को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने गंभीरता से लिया है। अपने आवास पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान सामने आए इस मामले में मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में संबंधित अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जनता का उत्पीड़न किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।
जनसुनवाई में लखनऊ निवासी विद्युत उपभोक्ता अभिनव त्रिपाठी ने अपने घरेलू बिजली कनेक्शन से जुड़ी समस्या मंत्री के सामने रखी। उपभोक्ता के मुताबिक, उन्होंने फरवरी 2026 में तीन किलोवाट के घरेलू विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद बिजली विभाग की ओर से एक मार्च 2026 को 11,622 रुपये का स्टीमेट जारी किया गया, जिसे उन्होंने जमा भी कर दिया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्धारित राशि जमा करने के बावजूद उन्हें बिजली कनेक्शन नहीं मिला। इसके बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उपभोक्ता ने आरोप लगाया कि कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया के दौरान उनसे कथित रूप से रिश्वत की मांग की गई। लंबे समय तक कनेक्शन नहीं मिलने और बाद में अधिक राशि का स्टीमेट जारी होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
अभिनव त्रिपाठी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि संबंधित सहायक अभियंता शुभम सिंह ने बिजली कनेक्शन देने के एवज में उनसे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, रिश्वत नहीं देने पर 12 अक्टूबर 2026 को करीब 2.24 लाख रुपये का नया स्टीमेट जारी कर दिया गया।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया, स्टीमेट में अंतर और उपभोक्ता के साथ किए गए व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, फिलहाल रिश्वत मांगने का आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाया गया है। इसकी पुष्टि संबंधित विभाग की निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी। नए स्टीमेट की राशि बढ़ने के कारणों और दोनों स्टीमेट के बीच अंतर की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
पूरी शिकायत सुनने के बाद ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से पड़ताल की जाए और यदि संबंधित अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने, उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान करने या उनके काम में बेवजह देरी करने की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए अनावश्यक परेशान न होना पड़े।
ऊर्जा मंत्री ने निर्देश दिया कि विद्युत कनेक्शन से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उपभोक्ताओं के आवेदन समय पर निस्तारित हों और यदि किसी मामले में अतिरिक्त राशि का स्टीमेट जारी किया जाता है, तो उसके पीछे स्पष्ट और नियमानुसार कारण हों।
बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उपभोक्ताओं को विभागीय कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए शिकायतों की नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय करना जरूरी है। इस मामले में भी पहले जारी स्टीमेट की राशि जमा होने, कनेक्शन लंबित रहने और बाद में नए स्टीमेट की राशि बढ़ने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अपने आवास पर आयोजित जनसुनवाई में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान पेयजल आपूर्ति, अतिक्रमण, विद्युत कनेक्शन, बिजली बिल में सुधार और नए विद्युत सबस्टेशन की स्थापना सहित नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग से संबंधित कई शिकायतें सामने आईं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायत का निस्तारण केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि समस्या का वास्तविक समाधान किया जाए। शिकायतकर्ता को राहत मिलने के साथ कार्रवाई की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने समयबद्ध निस्तारण पर जोर देते हुए कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
बिजली कनेक्शन से जुड़े इस मामले में अब विभागीय जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच में यह स्पष्ट किया जाना होगा कि कनेक्शन जारी करने में देरी क्यों हुई, पहले स्टीमेट की राशि जमा होने के बावजूद प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई और बाद में करीब 2.24 लाख रुपये का नया स्टीमेट किन आधारों पर जारी किया गया। साथ ही रिश्वत मांगने के आरोप की भी निष्पक्ष जांच की जानी होगी। ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के बाद शिकायतकर्ता को कार्रवाई की उम्मीद है। अब निगाहें विभागीय जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर रहेंगी। मामले में दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जबकि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Updated on:
29 Oct 2026, 4:36 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 3:37 PM IST
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