
यूपी में विभिन्न दलों के नेता
UP Politics: विपक्ष के बिखराव का फायदा सीधे तौर भाजपा को मिलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय निकाय चुनाव से लेकर एमएलसी चुनावों तक भाजपा ने इसका फायदा उठाया है। राष्ट्रीय स्तर पर छिटपुट हो रहे प्रयासों के बीच यूपी में विपक्ष की आपसी तनातनी, मुनाफा-फायदा की राजनीति के कारण बिखराव से भारतीय जनता पार्टी गदगद है।
पार्टी इस तरह के विकलांग विपक्ष से आगामी 2024 के चुनावी रेस में काफी आगे निकल जाएगी यह उम्मीद की जा रही है। एमएलसी चुनाव की दो सीटों पर चुनाव हुए और भाजपा ने दोनो सीटों पर जीत दर्ज कर लिया। भाजपा के मानवेंद्र सिंह को 280 और पदमसेन को 279 मत मिले, इसी प्रकार सपा के रामजतन राजभर को 113 वोट मिले जबकि दोनो पदों के लिए हुए चुनाव में एक-एक मत अवैध घोषित किया गया। विधान परिषद, विधान सभा और नगरीय निकाय चुनाव में सबसे अधिक घाटे में कोई पार्टी रही तो वह सपा है।
जिसके कारण समाजवादी पार्टी में इन दिनों भारी निराशा देखने को मिल रही है। जबकि बसपा की स्थिति वह है जहां उसके पास खोने को कुछ नहीं बचा है। इस बीच सपा के लिए जो संतोषजनक बात है वह यह कि रालोद के साथ उसका गठबंधन मजबूत रहा है।
कांगे्रस और बसपा की हालत
विधान परिषद चुनाव में आश्चर्यजनक तौर पर कांग्रेस के दो और बसपा के एक विधायक ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। पिछला विधान सभा चुनाव सपा के साथ मिलकर लडऩे वाली सुभासपा ने इस बार भाजपा का साथ दिया। यहां तक कि रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया की पार्टी ने भी भाजपा का साथ दिया।
दो सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा के लक्ष्मण आचार्य को सिक्किम का राज्यपाल बना दिया गया था, जबकि दूसरे सीट पर बनवारी लाल दोहरे की मृत्यु हो गई थी जिससे यह दो सीटें खाली हुई थी। भाजपा के दोनो प्रत्याशी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
विपक्ष की अपनी-अपनी डफली
सपा को मिल रहे लगातार हार से पार्टी को उबरने में वक्त लगेगा। इसका सीधा असर आगामी लोक सभा चुनाव पर पड़ेगा। सपा के लिए मुश्किल यह है कि उसे रालोद को छोडक़र अन्य किसी दल का साथ नहीं मिल पा रहा है। तो वहीं बसपा के पास पाने के सिवा खोने के लिए कुछ नहीं है, पार्टी ने संगठन की कमियां दूर करने के साथ मंडल कोआर्डिनेटरों में भारी फेरबदल कर लोकसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत कर दी है।
कांग्रेस की स्थिति यह है कि उसे राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने पर विरोध के लिए कार्यकर्ताओं का टोंटा लगा था। हताश और निराश कांगे्रस पार्टी अपने वजूद को कायम रखने की लड़ाई उत्तरद प्रदेश में लड़ रही है। हांलाकि कांग्रेस के लिए राहत की बात है कि कई दशकों से रुठा हुआ मुस्लिम वोटर अब धीरे-धीरे कांग्रेस के प्रति साफ्ट होता जा रहा है। जिसका फायदा उसे लोकसभा में मिल सकता है।
गदगद भाजपाई लोकसभा के लिए आत्मविश्वास से भरे हैं
विपक्ष के बिखराव से भाजपा गदगद है। उसे अपनी सत्ता पर किसी भी प्रकार का संकट या चुनौती नहीं दिखाई दे रही है। पार्टी में इस बात का आत्मविश्वास दिखाई देता है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव बड़े आसानी से जीत लेगी और अपने तय आंकड़ों को भी प्राप्त कर लेगी। भाजपा ने अभी से लोकसभा को देखते हुए बैठकों और कार्यकर्ता सम्मेलनों का दौर भी शुरू कर दिया है।
Published on:
31 May 2023 04:37 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
