याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि श्री बांके बिहारी मंदिर एक निजी धार्मिक संस्था है और सरकार इस अध्यादेश के जरिए मंदिर की संपत्ति और प्रबंधन पर अपरोक्ष नियंत्रण हासिल करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मंदिर के कोष का उपयोग जमीन खरीदने और निर्माण कार्यों में करना चाह रही है, जो कि अनुचित है। दीवान ने कोर्ट से कहा कि सरकार हमारे धन पर कब्जा कर रही है। यह मंदिर एक निजी मंदिर है और हम सरकार की योजना पर एकतरफा आदेश को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दीवानी मुकदमों में, जिनमें मंदिर पक्षकार नहीं था, सरकार ने पीठ पीछे आदेश हासिल कर लिए हैं।