
फांसी की सजा के बाद मुस्कान ने जेल अधीक्षक से मांगी कानूनी मदद ( फोटो डिजाइन : ChatGPT)
Meerut Blue Drum Case:मेरठ के चर्चित नीला ड्रम केस में फांसी की सजा पाने वाली मुस्कान ने अब हाईकोर्ट में अपील की तैयारी शुरू कर दी है। सजा सुनाए जाने के अगले दिन उसने जेल अधीक्षक से कानूनी मदद मांगी और अपील की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। वहीं, सौरभ राजपूत के परिजनों ने कहा है कि वे दोनों दोषियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। दूसरी ओर, मुस्कान के परिवार ने उससे दूरी बना ली है। जेल प्रशासन भी अदालत से सजा के आदेश की कॉपी मांगने की तैयारी कर रहा है। इस मामले में अदालत ने मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड सुनाया था।
जेल सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान रात में अपनी 11 महीने की बेटी राधा को सीने से लगाकर रोती रही। गुरुवार सुबह उठने और नाश्ता करने के बाद उसने जेल अधीक्षक से मुलाकात की। मुस्कान ने हाईकोर्ट में अपील करने का तरीका पूछा और पूरी प्रक्रिया समझाने के साथ कानूनी मदद मांगी। जेल प्रशासन शुक्रवार को अदालत को पत्र भेजकर सजा के आदेश की कॉपी मांगेगा। नियम के मुताबिक, मृत्युदंड के खिलाफ एक महीने के भीतर हाईकोर्ट में अपील करना जरूरी होता है।
मुस्कान के परिजनों ने उससे किनारा कर लिया है। उनका कहना है कि उसे अपने जुर्म की सजा मिली है। वहीं, सौरभ के परिवार ने साफ किया है कि वे दोनों दोषियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई जारी रखेंगे। इस मामले में सजा के बाद दोनों परिवारों का रुख अलग-अलग दिखाई दे रहा है।
अदालत ने साहिल और मुस्कान के अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी का माना। कोर्ट के मुताबिक, मुस्कान ने अपने पति सौरभ के विश्वास और प्रेम को बेरहमी से कुचला। सौरभ को क्रूर मौत का शिकार बनाया गया। अदालत ने कहा कि पारिवारिक रिश्ते में सामने आई यह क्रूरता मामले को विरलतम श्रेणी में रखती है।
कोर्ट ने यह भी माना कि दोनों दोषियों के सुधरने और समाज में वापस लौटने की संभावना नहीं दिखती। आदेश में उनकी जेल में रहने की अवधि के दौरान व्यवहार का जिक्र किया गया। अदालत के अनुसार, साहिल ने अपने पिता से मिलने में रुचि नहीं दिखाई, जबकि मुस्कान ने अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा नहीं जताई।
अदालत ने कहा कि डेढ़ साल में मुस्कान से मिलने उसके परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं गया। सुनवाई के दौरान भी दोनों दोषियों में अपराध बोध दिखाई नहीं दिया। कोर्ट ने माना कि उनके व्यवहार से सुधार की संभावना पर सवाल उठते हैं और ऐसा मानना मुश्किल है कि वे भविष्य में दोबारा ऐसा अपराध नहीं करेंगे।
अदालत ने कहा कि सौरभ की हत्या के बाद शव और सबूत छिपाने का तरीका भी चौंकाने वाला था। इस घटना ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया। कोर्ट के मुताबिक, नीला ड्रम केस ने पारिवारिक रिश्तों में डर और आशंका पैदा की है। युवाओं के मन में भी रिश्तों के भीतर होने वाले विवादों को लेकर अनजाना भय पैदा हुआ है। सजा के आदेश में अदालत ने महाभारत के एक श्लोक का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि जिस राज्य में राजा दंड देने में रुचि रखता है, वहां धर्म बचा रहता है।
Updated on:
16 Oct 2026 10:42 am
Published on:
16 Oct 2026 10:27 am
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