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आखिर भाजपा ने तेजवीर सिंह को यूपी को-ऑपरेटिव बैंक का चेयरमैन क्यों बनाया ?

सहकारिता पर पिछले दो दशक से मुलायम परिवार का था कब्जा
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मथुरा

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Bhanu Pratap Singh

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Updated: 11 Aug 2018, 9:43 AM IST

tejveer singh

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मथुरा। यूपी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के चेयरमैन पद पर मथुरा से तीन बार के सांसद रहे तेजवीर सिंह द्वारा कार्यभार संभाल लिया है। इसके साथ ही यूपी को-ऑपरेटिव से भाजपा ने मुलायम सिंह परिवार का एकाधिकार समाप्त हो गया है। तेजवीर सिंह का निवार्चन छह वर्ष के लिए हुआ है। उनके निर्वाचन के साथ ही निदेशक मंडल का गठन कर लिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार तेजवीर सिंह को यूपी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का चेयरमैन क्यों बनाया?

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मुलायम परिवार का एकाधिकार तोड़ा

मथुरा के पूर्व सांसद तेजवीर सिंह ने अब सहकारिता जगत की सबसे बड़ी कुर्सी पर काबिज होकर मुलायम सिंह परिवार के एकाधिकार को तोड़ दिया है। मुलायम सिंह ने को-ऑपरेटिव से ही अपनी राजनीति प्रारंभ की थी। पहले वह स्वयं बड़े पदों पर काबिज होते थे। बाद में अपने अनुज शिवपाल सिंह यादव को को-ऑपरेटिव बैंक सौंप दिया था। इस पर दो दशक से इसी परिवार का कब्जा था। बीच में मायावती के शासन में भी शिवपाल सिंह यादव को-ऑपरेटिव बैंक में चेयरमैन थे। अखिलेश सरकार में भी शिवपाल सिंह के बेटे इस बैंक के चेयरमैन रहे।

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सहकारिता की निचली इकाइयों में भी भाजपा काबिज

अब ये माना जा रहा है कि भाजपा यूपी में कोआपरेटिव में पैर जमा कर राजनीति करेगी और सपा को आने नहीं देगी। को-आपरेटिव का प्राय: हर किसान सदस्य होता है। इस कारण करोड़ों की वोट बैंक पर इसका सीधा असर होता है। निचली सोसाइटियों में भी सपा के स्थान पर भाजपा काबिज हो गयी है।

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ये है कारण

तेजवीर सिंह अटल बिहारी वाजपेयी के समय में तीन बार मथुरा के सांसद रहे हैं। इस नाते तेजवीर का मथुरा लोकसभा सीट पर बड़ा दावा बनता है। भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी स्टार प्रचारक हेमा मालिनी यदि टिकट मांगती हैं तो उन्हें मना नहीं किया जा सकता। बताते हैं कि हेमा मालिनी ने हाईकमान से एक और चुनाव मथुरा से लड़ने की इच्छा जतायी है। इन्हीं सब कारणों से तेजवीर सिंह को को-ऑपरेटिव की कमान सौंपी गयी है। अब वे दावेदार नहीं हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा भी लोकसभा का चुनाव लड़ने का इच्छा जता रहे हैं।

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