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मेरठ में जेनेरिक दवा लेने वालों में हुर्इ 12 फीसदी की बढ़ोतरी

महंगी दवाइयों से अलग उसके मिलते-जुलते साॅल्ट की दवाइयों का उपयोग बढ़ा
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 16 Apr 2018, 5:06 PM IST

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मेरठ। जेनरिक दवाओं का उपयोग बढ़ाने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार जोर दे रहे हैं। उन्होंने चिकित्सकों से जेनरिक दवाएं लिखने की अपील की। समाज में उसका असर होता नजर आ रहा है। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से जेनरिक दवाओं की खपत लगातार बढ़ रही है। सन 2014 से 2016 के बीच जेनरिक दवाओं का मेडिकल स्टोरों में इजाफा हुआ है। साथ ही जेनेेरिक दवाआें लेने वालों की संख्या में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुर्इ है।

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मेरठ में खुले 50 मेडिकल स्टोर

आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में जेनरिक दवाओं के स्टोर काम कर रहे हैं। जबकि 2014 से पहले इसकी संख्या सीमित मात्रा में थी। अधिकतर स्टोर 2015-16 के बीच में खुले हैं। अकेले मेरठ में ही जेनरिक दवाओं के करीब 50 मेडिकल स्टोर खुल गए हैं।

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10 से 12 फीसदी की वृद्धि हुर्इ

पहले की अपेक्षा अगर आज गौर करें तो जेनरिक दवाओं की बिक्री में 10 से 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है। निमोसेट, वोवो, एलसिनेक, बूट्राफ्लाक्स जैसी दवाएं प्रचलन में आ रही हैं। केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन के राजनीश कौशल के मुताबिक जेनरिक दवाओं का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। हालांकि बिक्री अभी भी अपेक्षा अनुरूप नहीं है। अधिकतर डाॅक्टर अभी भी जेनरिक दवाएं लिखने से परहेज करते हैं। आम जनता भी उससे वाफिक नहीं है। अगर सरकार कोई कानून बनाती है तो स्थिति में काफी बदलाव आ जाएगा। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद जेनरिक दवाओं का प्रयोग एक-दो साल में बढ़ा है।

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तीन फेज में होता है परीक्षण

ड्रग इंस्पेक्टर नरेश मोहन के अनुसार इनके साल्ट का तीन फेज में परीक्षण होता है। गहन परीक्षण व शोध के बाद ड्रग कंट्रोल बोर्ड की अनुमति मिलने पर इन्हें प्रचलन में लाया जाता है। जेनरिक दवाओं का दाम सरकार की ओर से तय किया जाता है। जबकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दाम मनमाने होते हैं। यही कारण है कि दोनों के दाम में काफी अंतर होता है।

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लोगों में जागरूकता का आभाव

ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि जेनरिक दवाओं का यह है मतलब है कि किसी भी बीमारी के इलाज के लिए डाक्टर जो दवा लिखते हैं ठीक उसी दवा के साल्ट वाली जेनरिक दवाएं उससे काफी कम कीमत पर आपको मिल सकती हैं। दवा के दाम का यह अंतर पांच से दस गुना तक हो सकता है, लेकिन लोगों में जेनरिक दवाओं के लिए जागरुकता नहीं है। यह भी जानना आवश्यक है कि देश की लगभग सभी नामी दवा कंपनियां ब्रांडेड दवाओं के साथ उसी साल्ट पर कम कीमत वाली जेनरिक दवाएं भी बनाती हैं। लेकिन ज्यादा लाभ के चक्कर में डाक्टर और कंपनियां लोगों को इस बारे में कुछ नहीं बताते। इसी वजह से लोग महंगी दवाएं खरीदने को विवश होते हैं।

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