
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. पश्चिम उत्तर प्रदेश में कैंसर की जननी कही जाने वाली काली नदी को अब वेस्ट यूपी के हैंडपंपों ने पीछे कर दिया है। कारण इनसे निकलने वाले पानी में कैंसर के सबसे बड़े कारक क्रोमियम, पारा और आयरन की मात्रा अधिक मिली है। ऐसा हम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश जल निगम की रिपोर्ट बता रही है। जिन जिलों में हैंडपंपों का पानी घातक हो गया हैं, उन जिलों में मेरठ, बागपत, शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद शामिल हैं। इन जिलों को रेड जोन में शामिल किया गया है।
बता दें कि क्रोमियम, पारा और आयरन जैसी घातक घातु के मिश्रित पानी पीने से कैंसर के अलावा अन्य जानलेवा बीमारियां पैदा होती है। अभी हाल ही में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी एनजीटी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश.जल निगम और पंचायतीराज विभाग को गम्भीर होती जा रही इस समस्या को प्राथिमकता पर निपटाए जाने के निर्देश भी दिए। एनजीटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों के भूगर्भ जल में अपमिश्रण मिला और आयरन की अधिकता की वजह से हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। इन छह जिलों में करीब एक हजार हैंडपंपों पर जल निगम ने लाल निशान लगाकर इनका इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है।
उत्तर प्रदेश जल निगम ने पंचायतीराज विभाग को इन हैंडपंपों की सूची के साथ एक पत्र भेजा है, जिसमें विभाग से अपेक्षा की गई है कि वह इन प्रतिबंधित किए गए हैंडपंपों को उखड़वाए। मगर, पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक उन्हें जल निगम की ओर से ऐसी कोई सूची या पत्र नहीं मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप की मरम्मत और उनको लगाने या रिबोर करवाने की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग की होती है।
Published on:
15 Feb 2021, 11:51 AM IST
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