भूगोल वैज्ञानी और पर्यावरणविद् डा. कंचन सिंह कहते हैं कि विकास के नाम पर वेस्ट यूपी में पिछले 10 वर्षाें से हो रही लगातार अवैध कटाई ने जहां मानवीय जीवन को प्रभावित किया है, वहीं असंतुलित मौसम चक्र को भी जन्म दिया है। वनों की अंधाधुंध कटाई होने के कारण देश का वन क्षेत्र घटता जा रहा है, जो पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक है। विकास कार्यों, आवासीय जरूरतों, उद्योगों तथा खनिज दोहन के लिए भी पेड़ों-वनों की कटाई वर्षों से होती आयी है। कानून और नियमों के बावजूद वनों की कटाई धुआंधार जारी है। वनों और वृक्षों का विनाश मौजूदा दौर में पश्चिम उप्र की की सबसे गंभीर और संवेदनशील समस्या बन गया है। डा. कंचन कहते हैं कि वेस्ट यूपी ही नहीं देश में भी पिछले 15 सालों में शहर बसाने और विकास के नाम पर हर मिनट 9.3 हेक्टेयर वन उजाड़ दिए गए।