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कैराना उपचुनावः अंतिम क्षणों में दलित और महिला वोटरों के लिए भाजपा ने खेला यह खास दाव

चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 26 May 2018, 6:46 PM IST

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कैराना उपचुनावः अंतिम क्षणों में दलितों और महिला वोटरों के लिए भाजपा ने खेला यह दाव

मेरठ। कैराना उपचुनाव के प्रचार का आखिरी दिन होने के बाद मतदान के दिन तक प्रचार गुपचुप तरीके से होगा। इस समय देश और प्रदेश के दिग्गजों का राजनीतिक अखाड़ा बने कैराना लोकसभा सीट और दलों के लिए आने वाला सप्ताह काफी अहम है। भाजपा ने तो पूरा सरकारी अमला कैराना और शामली की पांचों विधानसभाओं में झोंक दिया है। खुद भाजपा सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कैराना लोकसभा क्षेत्र में कैंप किए हुए हैं। वोटरों का रूख किस तरफ है, यह अभी किसी को पता नहीं है, लेकिन हर जाति और धर्म की वोटों के लिए दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है।

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संशय को दूर करेगी महिला प्रतिनिधि

सूबे के मुख्यमंत्री भी कैराना उपचुनाव में ध्रुवीकरण को हवा दे गए हैं, लेकिन भाजपा के दिग्गजों को अब भी दलित और अतिपिछड़े वोट मिलने में संशय है। इसी संशय का दूर करने के उद्देश्य से भाजपा ने एक महिला को कैराना उपचुनाव की कमान दी है। जिसका कार्य होगा महिलाओं और अति पिछड़ों के साथ ही दलित वोटों को भी भाजपा के पक्ष में करना। ये महिला और कोई नहीं डा. प्रियंवदा तोमर है। डा. प्रियंवदा भारत सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की यूपी की संयोजक हैं और इस समय राज्य महिला आयोग की सदस्य भी हैं। महिलाओं के वोट भाजपा के पक्ष में करने के लिए उन्हें प्रभारी बनाया गया है।

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जाट वोटरों को भी पक्ष में करने का प्रयास

डा. प्रियंवदा के लिए आने वाले दो दिन काफी अहम होंगे। वह जाट बिरादरी की होने के साथ ही शामली और कैराना में उनकी अच्छी खासी पैठ मानी जाती है। इसके अलावा वे इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए काफी काम भी कर चुकी हैं। उन्होंने इस क्षेत्र के गांवों में चिकित्सा कैंप लगाकर महिलाओं को कन्या भ्रूण हत्या के प्रति जागरूक करने का भी कार्य किया है। 'पत्रिका' से हुई डा. प्रियंवदा से बातचीत में उन्होंने बताया कि शामली-कैराना में चुनाव भाजपा के पक्ष में हैं। वे लोग पूरी जी-जान से लगे हुए हैं कि गांव में लोग भाजपा और मोदी जी की नीतियों की सराहना भी कर रहे हैं। कैराना चुनाव में भाजपा की जीत के बाद विपक्षी दलों की एकता बिखर जाएगी। विपक्षी स्वार्थ की राजनीति कर रहा है।

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