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फिल्म ‘सारांश’ की पटकथा जैसी ही कहानी है इस मां की, साउदी अरब से सात महीने बाद मिला बेटे का शव

मेरठ के परीक्षितगढ़ का है मामला, सात महीने में बहुत कठिनार्इ झेली अमन की मां राजबीरी ने  
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 4 May 2018, 10:49 PM IST

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मेरठ। 1984 में महेश भट्ट की फिल्म सारांश आयी थी। इसमें बीवी प्रधान आैर उनकी पत्नी पार्वती प्रधान विदेश में पैसा कमाने गए बेटे की मौत के बाद उसकी अस्थियां हासिल करने में दुश्वारियां झेलते हैं आैर उन्हें बड़ी मुश्किल से अस्थियाें का कलश मिल पाता है। एेसी ही कुछ कहानी मेरठ के परीक्षितगढ़ के गांव अगवानपुर की पूर्व प्रधान राजबीरी देवी के परिवार के साथ देखने को मिली है। राजबीरी का बेटा अमन सउदी अरब के रियाद में पैसा कमाने गया था, लेकिन वहां कार एक्सीडेंट में मृत्यु होने के बाद मां को अमन का शव सात महीने बाद मिला है।

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यह है मामला

परीक्षितगढ़ स्थित अगवानपुर गांव निवासी पूर्व प्रधान राजबीरी देवी का पुत्र अमन करीब एक वर्ष पूर्व सऊदी अरब के शहर रियाद में नौकरी करने गया था। वहां पर सितंबर 2017 में भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। सड़क हादसे में उसका शव बुरी तरह से जल चुका था, जिस कारण उसे पहचानना मुश्किल हो रहा था। अमन के मरने की सूचना जब उसके परिजनों को लगी तो परिवार में मातम छा गया। उन्होंने शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की तो रियाद प्रशासन ने शव को देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उसकी पहचान नहीं हो रही। शव अमन का ही है या किसी और का इस कारण परिजनों से उसका डीएनए मेल कराया जाएगा। डीएनए मेल होने पर ही अमन का शव भारत भेजा जा सकता है। मृतक अमन के परिजनों ने अपने डीएनए सेंपल कराए और भारतीय एंबेसी के माध्यम से साउदी अरब के रियाद प्रशासन को भेजा। जिस पर रियाद प्रशासन ने डीएनए मैच किया तो साबित हुआ कि शव अमन का ही है और उसके शव को भारत भेज दिया। डीएनए टेस्ट और उसके मैच प्रक्रिया में ही सात माह से अधिक का समय लग गया। जिस कारण अमन का शव रियाद की मोर्चरी में ही रखा रहा।

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शव के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ी

सऊदी से अमन का शव भारत लाने में उसके परिजनों को कठोर प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। मेरठ जिलाधिकारी के निर्देश पर अमन के माता-पिता का डीएनए टेस्ट जिला अस्पताल में कराया गया, लेकिन कई माह के बाद भी जिला अस्पताल से उसकी कोई रिपोर्ट नहीं मिली। वे कई बार जिला अस्पताल के चक्कर काटकर परेशान हो गए। थक-हारकर उन्होंने प्राइवेट लैब में ही डीएनए टेस्ट कराया और उसे भारतीय एंबेसी के माध्यम से रियाद भेजा।

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