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लॉकडाउन में भी किसानों ने खूब बहाया पसीना, भुगतान का समय आया तो 3050 करोड़ दबाकर बंद हो गईं चीनी मिलें

Highlights - गन्ना मूल्य भुगतान के नाम पर शुगर मिलों ने डाल दिया ताला - मेरठ जिले में 1298 करोड़ तो मंडल के किसानों का 3050 करोड़ बकाया - यूपी सरकार के दावे हुए खोखले
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मेरठ

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lokesh verma

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Updated: 4 Jun 2020, 9:56 AM IST

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मेरठ. लॉकडाउन के दौरान भी यूपी के गन्ना किसानों ने जमकर खेती की है। इस कारण यूपी देश का नंबर-1 चीनी उत्पादक प्रदेश बन गया है। इस सत्र में 11 हजार 500 लाख क्विंटल गन्ने की भी पेराई हुई और यूपी में रिकार्ड 1251 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया, लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो चीनी मिल मालिकों ने अपनी तिजोरी पर ताला लगा दिया। मेरठ जिले की 6 चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 1298 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। वहीं, मेरठ मंडल की बात करें तो यहां की शुगर मिलें किसानों का 3050 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान दबाकर बंद हो गई हैं।

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भुगतान के लिए रो रहा गन्ना किसान

मेरठ का गन्ना किसान अपने भुगतान के लिए रो रहा है। मेरठ मंडल की बागपत शुगर मिल को छोड़कर बाकी सभी 15 शुगर मिल पेराई सत्र 2019-20 का समापन कर बंद हो चुकी हैं। मेरठ जिले की 6 चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 1298 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। मेरठ मंडल पर बकाया भुगतान पर नजर डाली जाए तो गन्ना किसानों को अब तक केवल 41.65 प्रतिशत का भुगतान चीनी मिलों ने किया है। मेरठ मंडल की मिलों ने 1 जून तक खरीदे 5149 करोड़ रुपये के गन्ने का केवल 2098 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। शुगर मिलें किसानों का करीब 3050 करोड़ रुपया दबाकर बैठी है। नियम के मुताबिक गन्ना खरीदने के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान किसानों को करने का प्रावधान है। इसके बाद बकाया पर 15 फीसदी विलंब ब्याज देना पड़ता है। इतना सख्त कानून होने के बाद भी शुगर मिल मालिक किसानों को करोड़ों दबाए बैठी है। इस बारे में मिल प्रबंधन का कहना है कि जब तक चीनी नहीं बिकेगी, तब तक वह भुगतान करने की स्थिति में नहीं होंगे। वहीं, गन्ना उपायुक्त राजेश मिश्र ने बताया कि हाल ही में मिलें बंद हुई हैं। सभी मिलों को बकाया भुगतान करने के लिए नोटिस तामील कराए गए हैं।

किसानों ने चीनी मिलों के गोदाम भर दिए

मेरठ जिला गन्ना अधिकारी दुष्यंत कुमार ने बताया कि वर्तमान पेराई सत्र 2019-20 में जिले की सभी छ चीनी मिलों में 814 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। पिछले पेराई सत्र 2018-19 की बात करें तो 721 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। इस तरह यदि दोनों पेराई सत्र के अंतर पर नजर डाली जाए तो वर्तमान पेराई सत्र में 93 लाख क्विंटल की बढ़ोतरी है। प्रदेश में इस सत्र में 11 हजार 500 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। इसके साथ 1251 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसके साथ ही महाराष्ट्र को छोड़कर यूपी देश का नंबर चीनी उत्पादक प्रदेश बन गया है। सरकार ने लॉकडाउन के दौरान सभी 119 चीनी मिलें चलाईं।

ये है सरकार का दावा

योगी आदित्यनाथ सरकार का दावा है कि इस सत्र में गन्ना किसानों को 20 हजार करोड़ का भुगतान सीधे उनके खातों में किया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि बीते तीन साल में सरकार ने गन्ना किसानों को 99 हजार करोड़ का भुगतान किया है।

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