
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. जिस समय की बचत के लिए वाहनों में फास्टैग (Fastag) लगाना अनिवार्य किया जा रहा है। वहीं फास्टैग वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन रहा है। सिवाया टोल प्लाजा (Toll Plaza) पर आए दिन फास्टैग लगे वाहनों को परेशानी से दो-चार होना पड़ता है। फास्टैग लगे वाहन को टोल से गुजरने में कितना समय लगना चाहिए? शायद एक मिनट से भी कम। लेकिन, दिल्ली-देहरादून हाईवे (Delhi-Dehradoon Highway) स्थित सिवाया टोल पर यह संभव नहीं हो पा रहा है। टोल की अव्यवस्थाओं के चलते 15 से 30 मिनट तक का समय वाहन चालकों को इंतजार में गुजारना पड़ रहा है। कभी-कभी तो आधा घंटे तक टोल की कतार में ही लगे रहना पड़ता है। कभी नेट स्लो और कभी स्केन न होने की दिक्कत के चलते हर रोज यहां लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शायद ही ऐसा कोई दिन रहा हो, जब वाहनों की कतार न लगी हो।
फास्टैग लागू हुए करीब एक साल हो गया है। शुरुआत में माना जा रहा था कि इससे समय बचेगा। टोल पर वाहनों की कतार नहीं लगेगी। यहां से हर रोज लगभग 30 हजार वाहन गुजरते हैं। इनमें आधे वाहन फास्टैग वाले होते हैं। बाकी वाहन कैश वाले शामिल होते हैं। रोजाना 100 से अधिक वाहनों में फास्टैग टोल पर ही लगाए जा रहे हैं। वाहनों के लिए आठ लाइन टोल पर है। इनमें से चार लाइन फास्टैग के लिए हैं। बाकी लाइन टोकन के लिए हैं, जिन पर समय अधिक लगता है।
सिवाया टोल प्लाजा मैनेजर ने बताया कि टोल प्लाजा वाहनों की कतार इसलिए लग जाती है, क्योंकि वाहन चालक फास्टैग रिचार्ज नहीं कराते हैं और फास्टैग वाली लाइन में आ जाते हैं। इन्हेंं टोकन लेना पड़ता है। मेरठ निवासी प्रेम देव ने बताया कि सिवाया से मेरठ पहुंचने में उनको एक घंटा लग गया। कार में फास्टैग लगा हुआ था। 20 मिनट से अधिक समय तक लाइन में लगना पड़ा। इसका कारण नेट स्लो होना बताया गया। इसी तरह से बैंक मैनेजर संजीव शर्मा अपने परिवार के साथ हरिद्धार गए थे। वापसी में जब वे सिवाया टोल पर पहुंचे तो उसकी कार में लगा फास्टैग स्कैनर रीड नहीं कर पा रहा था। तब कर्मचारी ने हैंड हैंडिल मशीन से फास्टैग को रीड किया। इसमें समय लग गया। यदि स्कैनर सही रीड करने लगें तो ये दिक्कत न हो।
Published on:
28 Dec 2020 11:26 am
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