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वोटो की मजबूरी में भाजपा ने बनाया 9वीं पास विधायक को मंत्री, पीएचडी-स्नातक जाट-गुर्जर जनप्रतिनिधियों की टूटी आस

दिनेश खटीक आरएसएस से जुड़े रहे हैं। भाजपा के पुराने कार्यकर्ता भी हैं। उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने पुराने कार्यकर्ता को सम्मान देने के साथ पश्चिमी यूपी के समाजिक समीकरणों को दुरुस्त करने की कोशिश की है।
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मेरठ

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Nitish Pandey

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Updated: 28 Sep 2021, 11:09 AM IST

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मेरठ. कहते हैं राजनीति में सब कुछ संभव है। जब परिस्थितियां अपने पक्ष में हो तो एक मूर्ख भी राजा बन सकता है और जब यही परिस्थितियां विपरीत हो तो बुद्धिमान होकर भी धूंल फांकने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। कुछ ऐसा ही भाजपा के विधायकों के साथ हो रहा है। 9वीं पास हस्तिनापुर के जो विधायक कुछ दिन पूर्व तक अधिवक्ता आत्महत्या केस में पुलिस से बचते फिर रहे थे आज वहीं विधायक दिनेश खटीक भाजपा के लिए इतने कीमती हो गए कि उनको मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। अपनी सरकार के इस पैतरे से नौंवी पास इस भाजपा विधायक से अधिक पढ़े लिखे जाट-गुर्जर विधायक ठगे से रह गए।

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पीएचडी-स्नातक जाट-गुर्जर जनप्रतिनिधियों की टूटी आस

माना जा रहा था कि इस बार प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार में पीएचडी-स्नातक जाट-गुर्जर विधायकों केा शामिल किया जा सकता है। लेकिन हुआ इसका उल्टा। योगी के इस दूसरे मंत्रीमंडल विस्तार में उम्मीद लगाए बैठे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन विधायकों को मायूसी हाथ लगी। दिनेश खटीक पश्चिम से अकेले विधायक हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिली है। खटीक को राज्य मंत्री बनाकर भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ ही दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। दिनेश खटीक को मंत्रिमंडल में शामिल करने के साथ ही दलित बाहुल्य पश्चिम उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के गैर जाटव जातियों के वोटबैंक को भी लुभाने की कोशिश भाजपा ने की है।

टीम योगी में ये है पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थिति

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद मंडल से भूपेंद्र चौधरी के अलावा सहारनपुर मंडल से धर्म सिंह सैनी, सुरेश राणा और कपिल देव अग्रवाल मंत्री हैं। मेरठ मंडल से एकमात्र मंत्री गाजियाबाद से अतुल गर्ग हैं। बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल के विस्तार पर वेस्ट यूपी के भाजपा नेताओं खासतौर से विधायकों की नजरें गड़ी हुईं थी। लगभग एक दर्जन से अधिक विधायक मंत्री पद पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे।

आरएसएस से जुड़े रहे हैं दिनेश खटीक

मंत्री पद पाने के लिए विधायकों ने दिल्ली और लखनऊ की परिक्रमा के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संघ की गतिविधियों का केंद्र शंकर आश्रम में भी माथा टेका। लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। शॉर्ट नोटिस पर हुए विस्तार में केवल दिनेश खटीक को ही मौका मिला। हालांकि दिनेश खटीक स्वयं भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। भाजपा के पुराने कार्यकर्ता भी हैं। उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने पुराने कार्यकर्ता को सम्मान देने के साथ पश्चिमी यूपी के समाजिक समीकरणों को दुरुस्त करने की कोशिश की है।

पश्चिम के जिलों में दलितों की अच्छी खासी तादात

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में दलितों के साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं की खासी संख्या है। मुस्लिमों के बाद सबसे बड़ा वोट बैंक इन्हीं अनुसूचित जाति का है। अनुसूचित जाति में जाटव मतदाता पर अभी भी आमतौर पर बसपा का रंग चढ़ा हुआ है। भाजपा के दिनेश खटीक को गैर जाटव चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया है।

विपक्ष ने साधा निशाना

वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने कहा कि भाजपा ने कक्षा 9 पास विधायक को मंत्री बनाकर पुरानी परंपरा का निर्वहन किया है। उन्होंने कहा कि जिस सरकार में प्रधानमंत्री मोदी, स्मृति इरानी की डिग्री का पता नहीं हो वहां पर ऐसे ही मंत्री बनाए जा सकते हैं। उन्होंने भाजपा विधायक दिनेश खटीक पर आरोप लगाया कि वे भू माफिया हैं और उन पर कई मुकदमें दर्ज हैं।

BY: KP Tripathi

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